Haryana Road accident: दिल्ली-चंडीगढ़ NH-44 पर 12 घंटे के भीतर चार बड़े हादसे हुए, जिनमें दो लोगों की मौत और चार घायल हो गए। खराब ट्रक, चेतावनी संकेतों की कमी और लेट रेस्क्यू टीम पर उठे सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाइवे-44 एक ऐसा रूट माना जाता है, जहां दिन-रात हजारों वाहन गुजरते हैं। लेकिन शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच हुए लगातार चार हादसों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारी ट्रैफिक वाले इस हाइवे पर सुरक्षा की व्यवस्था कागजों तक ही सीमित है। 12 घंटे के भीतर दो लोगों की जान चली गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।
इनमें से दो हादसे इतने गंभीर थे कि शवों को निकालने के लिए ट्रक और कार को काटना पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार राहत कार्य में देरी भी हुई, क्योंकि हाइवे पर तैनात क्रेन और सहायता वाहन देर से पहुंचे।
पहला हादसा: एक घंटे तक केबिन काटना पड़ा
पहला हादसा शनिवार रात करीब 8 बजे शाहाबाद थाना परिसर के सामने हुआ। एक ट्रक टायर पंचर होने के बाद बिना किसी चेतावनी संकेत या रिफ्लेक्टर के सड़क पर खड़ा था। पीछे से तेज रफ्तार से आ रहा एक कैंटर ट्रक उस पर बुरी तरह जा भिड़ा।
28 वर्षीय हेल्पर आकाश (गाजियाबाद निवासी) केबिन में इतनी बुरी तरह फंस गया कि हाइड्रोलिक कटर से पूरा केबिन काटने में लगभग एक घंटा लग गया।
ड्राइवर को 20 मिनट की मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ट्रक कम से कम दो घंटे से सड़क पर खड़ा था, लेकिन हाइवे ऑथोरिटी की कोई टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची।
दूसरा हादसा: सुबह 6 बजे खड़े ट्रक से टकराई कार
दूसरा बड़ा हादसा रविवार तड़के धंतौड़ी गांव के पास हुआ। यहां फिर वही गलती दोहराई गई एक ट्रक बिना इंडिकेटर और रिफ्लेक्टर खड़ा था। करनाल से आ रही कार उसी से टकरा गई।
जितेंद्र (28), जो बिजली निगम में कार्यरत थे, कार की ड्राइवर सीट पर ही फंस गए।
घंटों की कोशिशों के बाद कार काटकर उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन वे मौके पर ही दम तोड़ चुके थे।
परिवार ने सुरक्षित हाइवे के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यदि हाइवे पर गश्त और त्वरित सहायता समय पर मिलती, तो शायद जान बच सकती थी।”
तीसरा हादसा: छोटे हाथी का टायर फटा, सामने से आती कार से भिड़ंत
रात 9 बजे रणजीत नगर कॉलोनी के पास एक छोटा हाथी टैंपो का टायर फट गया। वाहन अनियंत्रित होकर सामने से आ रही कार में जा घुसा।
कार में बैठे अमित और सुरेंद्र घायल हुए।
दोनों को शाहाबाद CHC में भर्ती कराया गया।
कार चालक के अनुसार, “टायर फटने के बाद छोटा हाथी अचानक सड़क के बीचों-बीच आ गया, हमें संभलने का मौका ही नहीं मिला।”
चौथा हादसा: बाइक सवार को कार ने मारी जोरदार टक्कर
रात लगभग 11 बजे मीरी-पीरी अस्पताल के पास एक कार ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। राहगीरों की मदद से घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया।
हाइवे सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल
स्थानीय लोग और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी देते आए हैं कि हाईवे-44 पर सुरक्षा मानकों का पालन बेहद कमजोर है।
ग्राउंड रिपोर्ट में जो प्रमुख कमियां सामने आईं:
पंचर या खराब ट्रकों को हटाने के लिए कोई त्वरित प्रणाली सक्रिय नहीं
40 किमी रेंज में एक क्रेन और एम्बुलेंस तैनात होने का नियम पर जमीनी हकीकत इसके विपरीत
हाईवे गश्त टीमों की अनुपस्थिति
रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेतों की अनदेखी
रात के समय खराब स्ट्रीट लाइटिंग वाले हिस्से
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि “हाईवे पर खड़े वाहनों की वजह से होने वाली मौतें रोकी जा सकती हैं, बशर्ते मॉनिटरिंग और रेपिड एक्शन सिस्टम मजबूत किए जाएं।”
पुलिस कार्रवाई: दो मामलों में FIR दर्ज
थाना प्रभारी सुनील वत्स ने बताया कि अब तक दो मामलों में शिकायत दर्ज कर ली गई है।
पुलिस का कहना है कि दोनों ट्रक चालकों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।













