बिहार के नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों में मानव तस्करी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले छह महीनों में सौ से भी ज्यादा लड़कियों के गायब होने की खबरों ने स्थानीय परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
यह घटनाएं अक्सर कुछ दिनों तक चर्चा में रहती हैं, फिर धीरे धीरे शांत हो जाती हैं, लेकिन परिवारों का दर्द और भय कम नहीं होता।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई गांवों में माता पिता अपनी किशोर बेटियों को घर से बाहर जाने से रोक रहे हैं। शाम के बाद तो लड़कियों का बाहर निकलना लगभग बंद हो चुका है। लोगों के बीच इस बात को लेकर सबसे ज्यादा डर है कि तस्करों के बड़े नेटवर्क सीमावर्ती इलाकों में बेरोकटोक काम कर रहे हैं।
मानवाधिकार आयोग के पास पहुंचा मामला
पटना के अधिवक्ता एसके झा ने लगातार बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में अलग अलग याचिकाएं दाखिल की हैं।
उनका कहना है कि कई लड़कियों को नेपाल के रास्ते चीन, सऊदी अरब और ब्राजील तक ले जाने की आशंका है। झा के अनुसार मोतिहारी और इसके आसपास के इलाकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले गिरोह सक्रिय हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाते हैं।
उनकी याचिका में यह भी बताया गया है कि तस्कर लड़कियों का इस्तेमाल कई अवैध गतिविधियों में कर रहे हैं, जिनमें नशीले पदार्थों की आपूर्ति कराने से लेकर जबरन शादी और देह व्यापार शामिल है।
कितनी लड़कियां हुईं गायब
सीमा क्षेत्र से लड़कियों के गायब होने के आंकड़े चिंताजनक हैं।
जुलाई में दस लड़कियां
अगस्त में अठारह
सितंबर में सत्रह
अक्टूबर में पंद्रह
नवंबर में फिर पंद्रह लड़कियां
इनमें से कई मामलों में परिवारों को महीनों बाद भी कोई जानकारी नहीं मिली है।
हालांकि हाल के हफ्तों में प्रशासन ने लगभग एक दर्जन लड़कियों को रेस्क्यू किया है, लेकिन यह संख्या कुल घटनाओं के मुकाबले बेहद कम है। राहत की बात यह भी रही कि बचाई गई लड़कियों में से चार एक ही परिवार से थीं, जिससे कुछ परिवारों को उम्मीद मिली है।
पुलिस पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही घटनाओं के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में नियमित निगरानी बढ़ाए बिना इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल है। कई गांवों में तस्करों के बारे में अफवाहें और डर फैला हुआ है, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
मानवाधिकार आयोग से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सीमाओं पर कड़ी निगरानी, जागरूकता अभियान और तस्करी नेटवर्क की वित्तीय जांच की जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्यों बढ़ रही है मानव तस्करी
मानव तस्करी विशेषज्ञों के अनुसार इसके कई कारण हैं
आर्थिक तंगी
ग्रामीण युवतियों में रोजगार के अवसरों की कमी
सीमा क्षेत्रों में कमजोर निगरानी
अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों का सक्रिय नेटवर्क
कुछ मामलों में तस्कर लड़कियों को नौकरी या शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं।













