हरियाणा सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य में चल रही 25 हजार से ज्यादा स्कूल बसों की जांच में यह सामने आया कि 5200 वाहन सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। लंबे समय से सुरक्षा को लेकर शिकायतें उठ रही थीं, ऐसे में अब पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है और चेतावनी आधारित प्रणाली की जगह सीधा प्रवर्तन मॉडल लागू किया जा रहा है।
क्यों हुआ यह सख्त अभियान
बीते कुछ महीनों से सोशल मीडिया और माता पिता के बीच स्कूल बसों की असुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही थी। दुर्घटनाओं और गैर अनुपालन के मामलों ने सरकार को जांच शुरू करने के लिए बाध्य किया।
एक वरिष्ठ ट्रैफिक अधिकारी के मुताबिक यह कदम कागजी औपचारिकता नहीं बल्कि फील्ड आधारित निरीक्षण है।
आंकड़े बताते हैं हालात कितने गंभीर थे
तीन से दस नवंबर के बीच चलाए गए अभियान में
5516 बसों की जांच हुई
1003 बसों पर चालान जारी
सिरसा और डबवाली में चार बसें तुरंत जब्त
जनवरी से अक्टूबर 2025 तक किए गए निरीक्षण में भी करीब 4205 बसें नियम तोड़ते हुए मिलीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े संकेत देते हैं कि यह समस्या व्यवहारिक कमियों से कहीं ज्यादा एक प्रणालीगत विफलता बन रही थी।
अब निरीक्षण रुकने वाला नहीं
सूत्रों के अनुसार यह अभियान अब एक निरंतर निगरानी प्रणाली में बदला जा रहा है।
प्रत्येक जिले को निर्देश दिए गए हैं कि
स्कूल बसों की जानकारी समय पर अपडेट की जाए
दस्तावेजों का सत्यापन नियमित रूप से हो
गैर अनुपालन पर तुरंत कार्रवाई की जाए
अधिकारियों का मानना है कि यह पहली बार है जब स्कूल परिवहन व्यवस्था को इतने व्यापक तरीके से जवाबदेह बनाया जा रहा है।
किन जिलों में सबसे खराब स्थिति
जांच में गुरुग्राम, पंचकूला, सोनीपत, फरीदाबाद, सिरसा और पलवल जैसे शहर सबसे आगे रहे।
केवल गुरुग्राम में 5984 बसों की जांच में 1851 वाहन नियमों के खिलाफ मिले
रेवाड़ी, डबवाली और चरखी दादरी में कम मामले सामने आए लेकिन सिरसा और डबवाली में बसों की खराब हालत के कारण उन्हें मौके पर ही इम्पाउंड करना पड़ा।
जांच के दौरान कुछ बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, जीपीएस और आपात निकास तक नहीं पाए गए जो राष्ट्रीय मानकों का गंभीर उल्लंघन है।
DGP का सख्त संदेश ऑपरेटरों के लिए चेतावनी
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि
असुरक्षित स्कूल बसें सड़क पर नहीं चलेंगी।
उनकी पोस्ट को एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अब नियम तोड़ने वालों को लापरवाही का लाभ नहीं मिलने वाला।
कौन सी सुविधाएं अनिवार्य हैं
राज्य सरकार ने दोहराया है कि हर स्कूल बस में
• फिटनेस सर्टिफिकेट
• जीपीएस
• फायर एक्सटिंग्विशर
• फर्स्ट एड बॉक्स
• कैमरा जहां लागू हो
• आपातकालीन निकास
• प्रशिक्षित चालक और परिचालक
• सीट बेल्ट और मानक पहचान चिन्ह
का होना जरूरी है। उल्लंघन पर चालान, जब्ती और कानूनी कार्रवाई तय है।
अभिभावक भी निभाएं जिम्मेदारी
पुलिस ने माता पिता से भी आग्रह किया है कि वे सिर्फ स्कूल पर निर्भर न रहें बल्कि
बच्चे जिस बस में जाते हैं उसकी स्थिति जानें
सुरक्षा उपकरणों पर नजर रखें
गड़बड़ी दिखने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें
नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम केवल प्रवर्तन नहीं बल्कि समुदाय आधारित सुरक्षा मॉडल की ओर संकेत करता है।
आगे क्या
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में
नियमित चेकिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली लागू की जाएगी
हर जिले में स्कूल परिवहन की जवाबदेही निर्धारित होगी
सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वालों पर जुर्माने और ऑपरेशन बंद करने तक की कार्रवाई संभव है
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अभियान यदि सतत और पारदर्शी रहा, तो हरियाणा का मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है।













