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Ahoi Ashtami 2025 पर Fatehabad में इस टाइम दिखेगा चांद, पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत कथा

On: अक्टूबर 10, 2025 1:56 अपराह्न
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Ahoi Ashtami 2025 पर Fatehabad में इस टाइम दिखेगा चांद, पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत कथा
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Ahoi Ashtami 2025 Fatehabad mein chand kab niklega: अहोई अष्टमी हिंदुओं का एक खास पर्व है, जो माताओं के दिलों के बहुत करीब है। ये त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जो दीवाली से 8 दिन पहले और करवा चौथ के 4 दिन बाद आता है। महाराष्ट्र, गुजरात और कुछ दक्षिणी राज्यों में अमांत कैलेंडर के अनुसार इसे आश्विन मास में मनाया जाता है। ये पर्व अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मध्य अक्टूबर से नवंबर के बीच आता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं।

Ahoi Ashtami 2025 पर Fatehabad में इस टाइम दिखेगा चांद

साल 2025 में अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी। ये पर्व अब सिर्फ 3 दिन दूर है।

अष्टमी तिथि का समय: 13 अक्टूबर, दोपहर 12:24 बजे से 14 अक्टूबर, सुबह 11:10 बजे तक

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त: 13 अक्टूबर, शाम 5:59 बजे से 7:14 बजे तक

सूर्योदय: 13 अक्टूबर, सुबह 6:26 बजे

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सूर्यास्त: 13 अक्टूबर, शाम 5:59 बजे

चंद्रोदय: 13 अक्टूबर, रात 11:40 बजे

अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत खासतौर पर माताएं अपने बच्चों, खासकर बेटों की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन माताएं पूरी श्रद्धा के साथ अहोई माता की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं गर्भधारण में मुश्किलों का सामना कर रही हैं या बार-बार गर्भपात का दुख झेल रही हैं, उनके लिए ये व्रत संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देता है। इसे ‘कृष्णाष्टमी’ भी कहा जाता है। इस मौके पर कई दंपति मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इससे भगवान कृष्ण जैसा पुत्र प्राप्त होता है।

अहोई अष्टमी की रस्में

अहोई अष्टमी का व्रत बहुत ही कठिन होता है। माताएं पूरे दिन बिना पानी और भोजन के उपवास रखती हैं। ये निर्जला व्रत शाम को तारा देखने के बाद खोला जाता है। कुछ जगहों पर चांद देखकर भी व्रत खोला जाता है, लेकिन इस दिन चांद देर से निकलता है, इसलिए तारा देखना ज्यादा प्रचलित है।

महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और अपने बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं। सूर्यास्त से पहले पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। दीवार पर अहोई माता और उनके आठ बच्चों का चित्र बनाया जाता है, जिसमें ‘अष्ट कोष्ठक’ यानी आठ कोनों का ध्यान रखा जाता है। इसके साथ ही ‘सेई’ (हेजहॉग और उसके बच्चों) का चित्र भी बनाया जाता है। अगर चित्र बनाना संभव न हो तो अहोई अष्टमी का वॉलपेपर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चित्र में सात बेटों और उनकी बहुओं को भी दर्शाया जाता है, जैसा कि व्रत कथा में बताया गया है।

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पूजा स्थल को साफ करके वहां अल्पना (रंगोली) बनाई जाती है। एक मिट्टी का करवा (घड़ा) पानी से भरकर उसका मुंह ढक्कन से बंद किया जाता है और उसमें ‘सरई सीनका’ नामक विशेष घास डाली जाती है। इस घास को पूजा में अहोई माता को अर्पित किया जाता है।

संध्या समय में, यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद, परिवार की सभी महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं। पूजा के बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनी जाती है। कुछ समुदायों में चांदी से बनी ‘स्याऊ’ की पूजा की जाती है, जिसे दूध, रोली और अक्षत के साथ पूजा जाता है। पूजा के बाद इसे दो चांदी के मोतियों के साथ धागे में पिरोकर गले में पहना जाता है।

पूजा में पूड़ी, हलवा और पुआ जैसी खास मिठाइयां बनाई जाती हैं। इनमें से 8-8 चीजें माता को अर्पित की जाती हैं और फिर किसी बुजुर्ग महिला या ब्राह्मण को दान दी जाती हैं। पूजा का समापन अहोई माता की आरती के साथ होता है।

अहोई अष्टमी की तारीखें (2020-2030)

2020: 8 नवंबर, रविवार
2021: 28 अक्टूबर, गुरुवार
2022: 17 अक्टूबर, सोमवार
2023: 5 नवंबर, रविवार
2024: 24 अक्टूबर, गुरुवार
2025: 13 अक्टूबर, सोमवार
2026: 1 नवंबर, रविवार
2027: 22 अक्टूबर, शुक्रवार
2028: 11 अक्टूबर, बुधवार
2029: 30 अक्टूबर, मंगलवार
2030: 19 अक्टूबर, शनिवार

अहोई अष्टमी की व्रत कथा

कहानी के अनुसार, बहुत समय पहले एक साहूकार अपने सात बेटों के साथ एक शहर में रहता था। दीवाली से सात दिन पहले, जब घर की साफ-सफाई चल रही थी, साहूकार की पत्नी नदी के पास खुले गड्ढे से मिट्टी लेने गई। उसे नहीं पता था कि वहां एक सेई (हेजहॉग) का घोंसला है। मिट्टी खोदते समय उसकी कुदाल से सेई का एक बच्चा मर गया।

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इस घटना से साहूकार की पत्नी बहुत दुखी हुई। वह उदास मन से घर लौट आई। कुछ दिनों बाद, सेई के श्राप के कारण, उसका सबसे बड़ा बेटा मर गया, फिर दूसरा, तीसरा, और इस तरह एक साल में उसके सातों बेटे चल बसे। अपने बच्चों की मौत से वह बहुत दुखी रहने लगी।

एक दिन, रोते हुए उसने अपनी पड़ोसन को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई और बताया कि उसने अनजाने में सेई के बच्चे को मार दिया था, और इसके बाद उसके सातों बेटे चले गए। पड़ोसन ने उसे सांत्वना दी और कहा कि पश्चाताप करने से उसका आधा पाप कम हो चुका है। उसने सलाह दी कि अहोई अष्टमी के दिन भगवती अहोई माता की पूजा करें, सेई और उसके बच्चों का चित्र बनाएं, और अपनी गलती के लिए माफी मांगें। ऐसा करने से भगवान की कृपा से उसके सारे पाप धुल जाएंगे।

साहूकार की पत्नी ने पड़ोसन की सलाह मानी और कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को व्रत और पूजा शुरू की। उसने हर साल नियमित रूप से ये व्रत रखा, और समय के साथ उसे फिर से सात बेटे प्राप्त हुए। तभी से अहोई अष्टमी व्रत की परंपरा शुरू हुई।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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