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Ahoi Ashtami 2025 पर Jhajjar में चांद और तारे देखने का समय, अहोई अष्टमी व्रत और पूजा समय

On: October 10, 2025 1:44 PM
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Ahoi Ashtami 2025 पर Jhajjar में चांद और तारे देखने का समय, अहोई अष्टमी व्रत और पूजा समय
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Ahoi Ashtami 2025 Jhajjar me chand kab niklega aaj timing: अहोई अष्टमी हिंदू धर्म का एक खास पर्व है, जो माताओं के लिए बहुत मायने रखता है। ये त्योहार दीवाली से करीब 8 दिन पहले और करवा चौथ के 4 दिन बाद, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं।

अहोई अष्टमी क्या है?

पहले के समय में अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपने बेटों की सुरक्षा और अच्छे जीवन के लिए रखती थीं। लेकिन अब समय बदल चुका है, और आज माताएं अपने बेटों और बेटियों, दोनों की खुशहाली के लिए ये व्रत रखती हैं। करवा चौथ की तरह ये भी निर्जला व्रत है, यानी बिना पानी और भोजन के दिनभर उपवास किया जाता है। हालांकि, करवा चौथ में चांद देखने के बाद व्रत खोला जाता है, लेकिन अहोई अष्टमी में शाम को तारा दिखने पर व्रत खोला जाता है।

Ahoi Ashtami 2025 पर Jhajjar में चांद और तारे देखने का समय

साल 2025 में अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी। नीचे दी गई तालिका में व्रत और पूजा के समय की पूरी जानकारी दी गई है:

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अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त: 13 अक्टूबर, शाम 6:14 से 7:27 बजे तक (1 घंटा 13 मिनट)

सांझ में तारा देखने का समय: शाम 6:25 बजे

चंद्रोदय का समय: दोपहर 12:00 बजे

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अष्टमी तिथि: 13 अक्टूबर, दोपहर 12:24 बजे से 14 अक्टूबर, सुबह 11:09 बजे तक (22 घंटे 45 मिनट)

अहोई अष्टमी की रस्में

अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं कई खास रीति-रिवाज निभाती हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाते हैं। माताएं दीवार पर अहोई माता और उनके आठ बच्चों का चित्र सिंदूर से बनाती हैं। इसके बाद एक कलश में पवित्र जल भरकर उस पर नारियल रखा जाता है। पूजा में घी का दीया जलाया जाता है और अहोई माता को फूल, मिठाई, सोने या चांदी के सिक्के अर्पित किए जाते हैं।

पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की कथा पढ़ी या सुनी जाती है। कई लोग इस मौके पर Jar ऐप के जरिए शुभ सोने के सिक्के खरीदते हैं। इस ऐप पर डिजिटल गोल्ड में पैसे बचाकर सोने के सिक्के या गहने खरीदे जा सकते हैं।

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संतान प्राप्ति के लिए भी खास

ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना करती हैं या अभी तक गर्भवती नहीं हुई हैं, वे भी इस व्रत को रखती हैं ताकि उन्हें स्वस्थ बच्चे का आशीर्वाद मिले। कुछ लोग मथुरा जिले के राधा कुंड में स्नान करते हैं। मान्यता है कि ये रस्म करने से दंपति को भगवान कृष्ण जैसा पुत्र प्राप्त होता है।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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