Ambala News Urdu poet Dr Nafas Ambalavi awarded in Australia: 28 अप्रैल 2025 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में एक खास शाम का आयोजन हुआ, जो पूरी तरह अम्बाला के मशहूर उर्दू शायर डॉ. नफ़स अम्बालवी के नाम रही। “बज़्म ए फ़रोग़ ए फ़न ओ अदब ऑस्ट्रेलिया” द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में डॉ. नफ़स को उनकी उत्कृष्ट उर्दू शायरी के लिए “रिकॉगनीशन अवॉर्ड” से नवाजा गया।
यह उनके लिए विदेशी धरती पर पहला पुरस्कार था, जिसने न केवल Dr Nafas Ambalavi की शायरी की गहराई को बल्कि अम्बाला और भारत की उर्दू साहित्यिक परंपरा को भी वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया। इस आयोजन के मुख्य अतिथि स्वयं डॉ. नफ़स थे, जिनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
Ambala News: डॉ. नफ़स अम्बालवी, उर्दू शायरी का चमकता सितारा
डॉ. नफ़स अम्बालवी लंबे समय से उर्दू शायरी की दुनिया में अपनी गहरी छाप छोड़ रहे हैं। देश-विदेश के असंख्य मुशायरों में उनकी शायरी ने श्रोताओं के दिलों को छुआ है। भारत में उन्हें हरियाणा उर्दू अकादमी द्वारा उनकी पुस्तकों और शायरी के लिए कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है।
1992 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैल सिंह ने भी उन्हें सम्मानित किया था। लेकिन सिडनी में मिला यह पुरस्कार उनके लिए एक नया मील का पत्थर साबित हुआ। इस सम्मान के लिए उन्होंने “बज़्म ए फ़रोग़ ए फ़न ओ अदब ऑस्ट्रेलिया” और विशेष रूप से संस्था के अध्यक्ष जनाब अख्तर अली का दिल से आभार व्यक्त किया।
Dr Nafas Ambalavi: एक भावनात्मक संदेश
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद डॉ. नफ़स ने अपने शालीन और भावनात्मक भाषण में कहा, “यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे शहर अम्बाला, हरियाणा और भारत में उर्दू शायरी के प्रेमियों का भी है।” उन्होंने सिडनी में मौजूद साहित्य प्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों का भी तहेदिल से शुक्रिया अदा किया। उनकी यह बातें न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाती हैं, बल्कि उर्दू साहित्य के प्रति उनके गहरे लगाव को भी उजागर करती हैं।
कार्यक्रम का शानदार आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था के अध्यक्ष जनाब अख्तर अली ने डॉ. नफ़स के साहित्यिक सफर पर प्रकाश डाला। इसके बाद एक प्रभावशाली पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने भारत में उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया। इस प्रस्तुति में प्रोफेसर गोपीचंद नारंग, ओम कृष्ण राहत, शादाब भटनागर, गुलज़ार देहलवी जैसी उर्दू साहित्य की महान हस्तियों का जिक्र किया गया, जिन्होंने अपनी रचनाओं से उर्दू अदब को नई ऊंचाइयां दीं। यह प्रस्तुति न केवल शिक्षाप्रद थी, बल्कि उर्दू साहित्य के प्रति श्रोताओं में नई जिज्ञासा भी जगाने में सफल रही।
उर्दू साहित्य का वैश्विक सम्मान
यह आयोजन न केवल डॉ. नफ़स की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि यह उर्दू साहित्य के वैश्विक महत्व को भी रेखांकित करता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में उर्दू शायरी के लिए इतना उत्साह और सम्मान देखना भारत के साहित्य प्रेमियों के लिए गर्व की बात है। डॉ. नफ़स की यह उपलब्धि उन सभी युवा शायरों के लिए प्रेरणा है जो उर्दू साहित्य को जीवित रखने के लिए प्रयासरत हैं।
अम्बाला का गौरव, उर्दू का सम्मान
Ambala News: डॉ. नफ़स अम्बालवी की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है। उनकी शायरी ने सात समंदर पार सिडनी में भी लोगों के दिलों को जीता। यह पुरस्कार उर्दू साहित्य की ताकत और उसकी वैश्विक पहुंच का प्रतीक है। आइए, हम भी इस मौके पर डॉ. नफ़स को बधाई दें और उर्दू साहित्य के इस सुनहरे सफर का हिस्सा बनें।












