Bhiwadi Polluted Water: Rao Indrajit attacks Balaknath, raises questions on Masani Barrage: भिवाड़ी प्रदूषित पानी (Bhiwadi Polluted Water): रेवाड़ी में मुख्यमंत्री नायब सैनी की धन्यवाद रैली में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भिवाड़ी से आने वाले प्रदूषित पानी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।
मंच पर मौजूद राजस्थान के तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ पर रैंप तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं होगी। राव ने मसानी बराज में दूषित पानी की समस्या का भी जिक्र किया और समाधान के लिए STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की मांग की। यह घटना रैली में चर्चा का केंद्र बन गई। आइए, इस विवाद के बारे में विस्तार से जानें।
भिवाड़ी के दूषित पानी का मुद्दा Bhiwadi Polluted Water
राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र से आने वाला रसायनयुक्त पानी धारूहेड़ा के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
बारिश के दौरान यह पानी नेशनल हाईवे को जाम कर देता है और स्थानीय लोगों को नरकीय जीवन जीने पर मजबूर करता है (Polluted Water Issue). काफी प्रयासों के बाद धारूहेड़ा में रैंप बनाकर इस पानी को रोका गया था। लेकिन राव ने आरोप लगाया कि बाबा बालकनाथ ने इस रैंप को तोड़ने की कोशिश की। उनके इस बयान से मंच पर मौजूद नेता हंसने लगे, लेकिन राव का गुस्सा साफ झलक रहा था।
मसानी बराज की समस्या
राव ने मसानी बराज में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी की गंभीरता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा छोड़ा गया यह दूषित पानी 20 से ज्यादा गांवों को प्रभावित कर रहा है (Masani Barrage Pollution). इस पानी में मछलियां और पक्षी तक नहीं आते, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
राव ने मांग की कि अधिक STP बनाकर इस पानी को बराज के बजाय दूसरी जगह प्रवाहित किया जाए। यह मुद्दा स्थानीय लोगों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह उनकी सेहत और आजीविका को प्रभावित करता है।
मंच पर तनातनी और कार्रवाई की मांग
रैली के दौरान बाबा बालकनाथ ने रेवाड़ी उपायुक्त अभिषेक मीणा से मंच पर बात की, जिसका विवरण सामने नहीं आया। हालांकि, बालकनाथ पहले भी इस पानी के मुद्दे पर उपायुक्त से चर्चा कर चुके हैं (Political Dispute). राव इंद्रजीत ने साफ कहा कि भिवाड़ी के प्रदूषित पानी पर ऐसी दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी।
उनका यह बयान न केवल बालकनाथ के लिए चेतावनी था, बल्कि सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग भी थी। यह घटना हरियाणा और राजस्थान के बीच जल प्रदूषण के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है।













