सोनीपत, Diesel Auto Ban: सोनीपत सहित एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को काबू करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने जिले में डीजल ऑटो पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है। इसके तहत, सोनीपत में चल रहे करीब 6,000 डीजल ऑटो को 31 दिसंबर के बाद सड़कों से हटाना होगा। अगर इस तारीख के बाद कोई डीजल ऑटो सड़क पर दिखा, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा और जुर्माना भी लग सकता है। इस फैसले से हजारों ऑटो चालकों और उनके परिवारों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है।
आदेश का पालन और चालकों की चिंता
क्षेत्रीय परिवहन निदेशालय (RTA) ने ऑटो चालकों को 31 दिसंबर तक डीजल ऑटो जिले से बाहर ले जाने के निर्देश दिए हैं। ऑटो चालक यूनियन के प्रधान के साथ मीटिंग कर इस आदेश की जानकारी दी जा चुकी है। RTA के एडीटीओ संजीव कौशिक ने बताया कि 1 दिसंबर से सख्ती शुरू होगी और सड़क पर पकड़े गए डीजल ऑटो को जब्त किया जाएगा। ऑटो चालक सोनू, सितेंद्र और नीरज ने चिंता जताते हुए कहा कि एक ऑटो की कीमत 2 से 2.5 लाख रुपये है। दो महीने में नया ऑटो खरीदना आसान नहीं है। उन्होंने सरकार से सब्सिडी या राहत की मांग की है, ताकि उनकी आजीविका पर संकट न आए।
पहले क्या थी शर्तें?
इससे पहले, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने आदेश दिया था कि दिल्ली और सोनीपत में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन नहीं चलेंगे। लेकिन नए आदेश में अब एक दिन पुराना डीजल ऑटो भी 31 दिसंबर के बाद सड़क पर नहीं चल सकेगा। इसका मकसद एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकना है, खासकर नवंबर-दिसंबर में जब नमी के कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है और AQI 500 से ऊपर चला जाता है।
सोनीपत में प्रदूषण पर सख्ती क्यों?
एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो चुकी है। NGT, सुप्रीम कोर्ट, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और CAQM मिलकर इसे काबू करने के लिए कदम उठा रहे हैं। डीजल ऑटो पर बैन इस दिशा में बड़ा कदम है। ऑटो चालक यूनियन के प्रधान अति प्रकाश ने बताया कि जिले में करीब 6,000 डीजल ऑटो हैं, जिन्हें हटाने का आदेश आया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से चालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। फिर भी, विभाग ने चालकों को समय रहते व्यवस्था करने की सलाह दी है।










