Delay in distribution of tablets in Haryana government schools: Students’ studies at risk:
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 43 दिन बीत चुके हैं, लेकिन छात्रों के हाथों में अभी तक टैबलेट नहीं पहुंचे हैं। यह देरी न केवल उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर रही है, बल्कि डिजिटल शिक्षा के सपने को भी धक्का पहुंचा रही है।
सरकार की महत्वाकांक्षी ई-अधिगम योजना के तहत पिछले साल हजारों छात्रों को टैबलेट दिए गए थे, लेकिन इस साल निदेशालय के आदेशों का इंतजार और आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ अनुबंध समाप्त होने की वजह से वितरण प्रक्रिया ठप पड़ी है। आइए, इस मुद्दे को गहराई से समझते हैं।
टैबलेट की कमी से पढ़ाई में बाधा Tablets in Haryana government schools
फरीदाबाद जिले के 378 सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 28,000 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र डिजिटल शिक्षा के लिए टैबलेट पर निर्भर हैं।
पिछले साल ई-अधिगम योजना के तहत इन छात्रों को टैबलेट दिए गए थे, जो ऑनलाइन कक्षाओं, होमवर्क और शैक्षिक सामग्री तक पहुंचने का प्रमुख साधन बने। लेकिन इस साल टैबलेट की अनुपलब्धता के कारण छात्रों को नोट्स लेने, ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करने और डिजिटल कंटेंट तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। कई छात्रों का कहना है कि बिना टैबलेट के उनकी पढ़ाई अधूरी सी लगती है।
क्यों हो रही है देरी?
शिक्षा विभाग के अनुसार, टैबलेट वितरण में देरी का मुख्य कारण आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ अनुबंध का समाप्त होना है। नए अनुबंध के लिए प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया कब पूरी होगी,
इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है। इसके अलावा, निदेशालय से टैबलेट वितरण के लिए औपचारिक आदेश भी जारी नहीं हुए हैं। इस अनिश्चितता के बीच स्कूल प्रशासन और शिक्षक भी असमंजस में हैं, क्योंकि वे छात्रों को डिजिटल शिक्षा प्रदान करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
पुराने टैबलेट का क्या हुआ?
पिछले शैक्षणिक सत्र के अंत में, 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को अपने टैबलेट कक्षा प्रभारी को जमा करने के निर्देश दिए गए थे। विभाग के अनुसार, अधिकांश छात्रों ने टैबलेट जमा कर दिए, लेकिन लगभग 100 छात्रों ने ऐसा नहीं किया। इन छात्रों के खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई की योजना बना रहा है। इसके अलावा, जमा किए गए टैबलेट में से 50 खराब पाए गए हैं, जिसके कारण इनका पुनर्वितरण भी संभव नहीं हो पा रहा है।
छात्रों और अभिभावकों की चिंता
टैबलेट की कमी ने न केवल छात्रों, बल्कि उनके अभिभावकों को भी चिंता में डाल दिया है। एक अभिभावक, रमेश कुमार, ने बताया, “हमारे बच्चों की पढ़ाई पहले ही कोविड के कारण प्रभावित हुई थी।
अब टैबलेट न मिलने से वे फिर पीछे रह जाएंगे।” छात्रों का कहना है कि बिना टैबलेट के ऑनलाइन होमवर्क और प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कई स्कूलों में शिक्षक पारंपरिक तरीकों से पढ़ाई कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डिजिटल संसाधनों की कमी के कारण यह प्रयास भी सीमित साबित हो रहा है।
सरकार के सामने चुनौती
हरियाणा सरकार ने ई-अधिगम योजना के जरिए सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का वादा किया था। लेकिन टैबलेट वितरण में देरी ने इस योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द आपूर्तिकर्ता के साथ नए अनुबंध को अंतिम रूप देना चाहिए और टैबलेट वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए। साथ ही, खराब टैबलेट की मरम्मत और गैर-जमा टैबलेट की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
भविष्य की राह
शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही टैबलेट वितरण शुरू हो जाएगा। लेकिन जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ता रहेगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी देरी न हो और डिजिटल शिक्षा का लाभ सभी छात्रों तक समय पर पहुंचे।
यह न केवल छात्रों के शैक्षिक भविष्य के लिए जरूरी है, बल्कि हरियाणा को डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।













