Gathering of Tablighi Jamaat 15 lakh people on 100 acres in Nuh: हरियाणा के नूंह जिले में 19 से 21 अप्रैल 2025 तक तब्लीगी जमात का भव्य जलसा आयोजित होने जा रहा है। फिरोजपुर झिरका में होने वाले इस आयोजन में देशभर से करीब 15 लाख लोग जुटेंगे। जलसे में अमीर मौलाना साद साहब सहित कई प्रमुख मौलाना शामिल होंगे। 100 एकड़ से अधिक जमीन पर पांडाल और बैठने की व्यवस्था की गई है। नूंह, जहां से तब्लीगी जमात की शुरुआत हुई थी, एक बार फिर इस्लामी प्रचार का केंद्र बनेगा। आइए, इस विशाल आयोजन की पूरी जानकारी जानते हैं।
नूंह में तब्लीगी जमात का ऐतिहासिक जलसा Gathering of Tablighi Jamaat
नूंह का फिरोजपुर झिरका इस बार तब्लीगी जमात के जलसे का मुख्य केंद्र होगा। आयोजन समिति के अनुसार, सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 21 एकड़ में विशाल पांडाल लगाया गया है, जबकि 100 एकड़ से अधिक जमीन बैठने और अन्य व्यवस्थाओं के लिए आरक्षित की गई है। प्रत्येक दिशा में 20-20 एकड़ की पार्किंग बनाई गई है ताकि लाखों लोगों की आवाजाही सुगम हो। जलसे में 10 से 15 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि नूंह की ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करता है।
पुलिस की एंट्री नहीं, सुरक्षा बाहर से
इस जलसे की एक खास बात यह है कि पहली बार किसी आयोजन में पुलिस को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। आयोजन स्थल के बाहर पुलिस बल तैनात रहेगा और ट्रैफिक सहित बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को संभालेगा। अंदर की सभी व्यवस्थाएं तब्लीगी जमात के वॉलंटियर्स द्वारा की जाएंगी। आयोजन समिति ने ट्रैफिक के लिए विशेष मैप तैयार किया है, और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। यह व्यवस्था आयोजन की शांति और अनुशासन को बनाए रखने के लिए की गई है।
चिकन बिरयानी को अनुमति, सख्त नियम
आयोजन समिति के मीडिया कोऑर्डिनेटर रफीक मास्टर ने बताया कि जलसे में खानपान को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। बिरयानी बेचने वालों को चेतावनी दी गई है कि केवल चिकन बिरयानी या वेज बिरयानी की बिक्री की अनुमति होगी। बड़े पशुओं के मांस की बिरयानी बेचने पर पुलिस कार्रवाई करेगी। यह नियम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और विवादों से बचने के लिए लागू किया गया है। कमिटी ने सभी व्यवस्थाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित रखने के लिए चार महीने से तैयारी की है।
नूंह: तब्लीगी जमात का उद्गम स्थल
नूंह का तब्लीगी जमात के इतिहास में विशेष महत्व है। 1926-27 में हजरत मौलाना इलियास कांधलवी ने नूंह से ही इस्लामी शिक्षा और प्रचार की शुरुआत की थी। उन्होंने नूंह को इस्लामिक प्रचार का केंद्र बनाया, और आज तब्लीगी जमात 150 से अधिक देशों में फैल चुकी है। इस जलसे में हजरत निजामुद्दीन से मौलाना साद साहब के साथ कई मौलाना शामिल होंगे, जो लोगों को इस्लामी रास्तों पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे। मेवात क्षेत्र में हर साल होने वाला यह जलसा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, और दिल्ली जैसे राज्यों में भी प्रसिद्ध है।
लोगों के लिए सुझाव
जलसे में शामिल होने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे आयोजन समिति के नियमों का पालन करें। खानपान और व्यवहार में संयम बरतें। ट्रैफिक व्यवस्था का ध्यान रखें और समय पर पार्किंग स्थल पर पहुंचें। अगर आप बाहर से आ रहे हैं, तो स्थानीय प्रशासन और कमिटी के दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी पुलिस चौकी या हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क करें। आयोजन स्थल पर भीड़ को देखते हुए अपने सामान और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
समाज के लिए संदेश
यह जलसा न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक है, बल्कि नूंह की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी दर्शाता है। तब्लीगी जमात का यह आयोजन लोगों को शांति, भाईचारा, और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करता है। आयोजन समिति की व्यवस्थित तैयारियां और पुलिस की बाहरी सुरक्षा इस जलसे को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।













