Haryana BJP News, डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़ : हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का इतिहास रचने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब अपने संगठन को धार देने में जुट गई है। राज्य में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर दिल्ली से चंडीगढ़ तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक अगले 48 घंटों के भीतर हरियाणा बीजेपी के नए कप्तान के नाम का ऐलान हो सकता है। इस अहम फैसले के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ लंबा मंथन किया है।
मोहन लाल बड़ौली का पलड़ा सबसे भारी
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के नाम की है। उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसके पीछे का गणित बिल्कुल साफ है। उनके नेतृत्व में ही पार्टी ने हालिया विधानसभा चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था।
पार्टी ने 90 में से 47 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया था। पार्टी का एक बड़ा धड़ा मानता है कि जीत के इस सिलसिले को जारी रखने के लिए बड़ौली को ही कमान सौंपी जानी चाहिए।
संजय भाटिया और संघ का कनेक्शन
करनाल लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रहे संजय भाटिया भी अध्यक्ष पद की रेस में मजबूती से बने हुए हैं। भाटिया की सबसे बड़ी ताकत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस में उनकी गहरी पैठ है। वे संगठन के पुराने खिलाड़ी माने जाते हैं और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके संबंध काफी मधुर हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी किसी ऐसे चेहरे को चाहती है जो संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत कर सके तो संजय भाटिया एक उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं।
मनोहर लाल के करीबी दीपक मंगला भी दौड़ में
अध्यक्ष पद की दौड़ में फरीदाबाद और पलवल क्षेत्र से आने वाले दीपक मंगला का नाम भी तेजी से उभरा है। मंगला को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का बेहद करीबी माना जाता है। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर का भी उन्हें खुला समर्थन हासिल है।
मंगला पहले भी प्रदेश सचिव और प्रदेश महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। दोनों दिग्गज नेता उनकी पैरवी कर रहे हैं जो उनकी दावेदारी को वजनदार बनाता है।
जातीय समीकरण और अन्य दावेदार
बीजेपी हमेशा अपने फैसलों से चौंकाती रही है इसलिए कुछ अन्य नामों को भी खारिज नहीं किया जा सकता। सुरेंद्र पूनिया: जाट समुदाय से आने वाले सुरेंद्र पूनिया को पार्टी का संकटमोचक माना जाता है। सीएम सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल दोनों के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें यह बड़ा इनाम दे सकती है।
असीम गोयल: पूर्व विधायक असीम गोयल भी मुख्यमंत्री के करीबी हैं और वे भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
डॉ अर्चना गुप्ता: अगर पार्टी महिला नेतृत्व पर दांव लगाना चाहेगी तो प्रदेश महामंत्री डॉ अर्चना गुप्ता के नाम पर मुहर लग सकती है।
क्यों हो रही है देरी
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व फूंक फूंक कर कदम रख रहा है। सरकार बनने के बाद अब संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बिठाना सबसे बड़ी चुनौती है। पार्टी ऐसा अध्यक्ष चाहती है जो कार्यकर्ताओं की बात सरकार तक पहुंचा सके और सरकार की योजनाओं को जनता तक ले जा सके। अगले दो दिनों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।












