चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नई दिल्ली में आयोजित इंडो-जापान कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए वैश्विक व्यापार जगत में राज्य की मजबूत स्थिति का दावा पेश किया है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में पहुंचे जापान के दिग्गज निवेशकों को हरियाणा के साथ नवाचार, निर्माण, प्रौद्योगिकी और स्थिरता के क्षेत्र में पार्टनरशिप करने का खुला निमंत्रण दिया। इस खास मौके पर हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास, अनुशासन और परंपरा के प्रति सम्मान के साझा मूल्यों पर टिके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत-जापान साझेदारी का सबसे सफल मॉडल देखना है, तो वह हरियाणा में मौजूद है।
जापानी उद्योगों का सबसे बड़ा केंद्र बना हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कॉन्क्लेव के मंच से आंकड़ों के साथ बात रखते हुए बताया कि आज हरियाणा पूरे भारत में जापानी उद्योगों का सबसे बड़ा हब बन चुका है। मौजूदा समय में प्रदेश के भीतर लगभग 394 जापानी उद्योग और 600 से अधिक जापानी व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी मजबूती से काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में अपनी जापान यात्रा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां की 9 प्रतिष्ठित कंपनियों ने हरियाणा में करीब 5 हजार करोड़ रुपये के निवेश का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता केवल बिजनेस-टु-बिजनेस (B2B) या गवर्नमेंट-टु-गवर्नमेंट (G2G) नहीं है, बल्कि हम जापानी निवेशकों के साथ एच2एच यानी ‘हार्ट टू हार्ट’ (Heart to Heart) का रिश्ता रखते हैं, जो हरियाणा को उनके लिए “होम अवे फ्रॉम होम” बनाता है।
गुरुग्राम-मानेसर के बाद अब नारायणगढ़ की बारी
निवेश के लिए जापानी कंपनियों की पहली पसंद हरियाणा क्यों है, इसका कारण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने जापानी कार्य संस्कृति, जैसे गुणवत्ता और अनुशासित कार्यबल को पूरी तरह अपनाया है। आज गुरुग्राम, मानेसर, सोनीपत, बावल और झज्जर जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान के मजबूत औद्योगिक एकीकरण की साफ तस्वीर दिखती है। मुख्यमंत्री ने आगे एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि झज्जर में विकसित हो रही जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप के बाद अब नारायणगढ़ में भी एक जापानी क्लस्टर प्रस्तावित है, जो आने वाले समय में जापानी औद्योगिक साझेदारी का नया केंद्र बनेगा। इसके अलावा राज्य में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 10 नई आईएमटी (IMT) स्थापित की जा रही हैं।
24 दिन का काम अब 12 दिन में
उद्योगपतियों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सुधारों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ की नीति पर चल रही है। सिंगल रूफ सिस्टम के तहत डिजिटल माध्यम से 140 से अधिक सेवाएं दी जा रही हैं, और सरकारी मंजूरियों में लगने वाले समय को 24 दिन से घटाकर सिर्फ 12 दिन कर दिया गया है। जापानी निवेशकों की हर छोटी-बड़ी समस्या के तुरंत समाधान के लिए सरकार ने विशेष ‘सकुरा डेस्क’ की स्थापना की है, जो निवेश पूर्व परामर्श से लेकर विस्तार योजनाओं तक हर स्तर पर जापानी कंपनियों को सीधा सहयोग प्रदान करेगी।
ऑटोमोबाइल और एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की 50 प्रतिशत कारों और 33 प्रतिशत दोपहिया वाहनों का निर्माण अकेले हरियाणा करता है, ऐसे में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में निवेश के लिए सोहना और खरखौदा आईएमटी सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को आधुनिक लॉजिस्टिक नेटवर्क के रूप में बदला जा रहा है, जहां ड्राई पोर्ट, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क में निवेश के बड़े मौके हैं। नई औद्योगिक क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पंजीकृत 13 लाख से अधिक एमएसएमई (MSME) ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में जापानी उद्योगों के साथ मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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