Haryana Indian Army: Guliana, the village of Haryana where there is a soldier in every third house, the passion of patriotism remains intact: हरियाणा के कैथल और जींद की सीमा पर बसा गुलियाणा गांव देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है। करीब पांच हजार की आबादी वाला यह छोटा सा गांव ‘फौजियों का गांव’ के नाम से मशहूर है,
जहां हर तीसरे घर से युवा भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। यहां के युवाओं में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा इस कदर है कि वे सुबह-शाम, बारिश-धूप में कड़ी मेहनत कर सेना में भर्ती होने का सपना पूरा करते हैं। गांव के अनुशासित नियम, रिटायर्ड फौजियों की ट्रेनिंग, और युवाओं का जोश इस गांव को देशभक्ति का प्रतीक बनाते हैं।
देशभक्ति की धरती: गुलियाणा Haryana Indian Army
कैथल जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बसे गुलियाणा में देशभक्ति की भावना हर गली-नुक्कड़ में देखी जा सकती है। यहां के युवा न केवल सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं, बल्कि गांव के नियम और अनुशासन उनकी इस राह को और मजबूत करते हैं।
पिछले सात सालों में 350 से अधिक युवाओं ने भारतीय सेना में जगह बनाई है, जो गांव की मेहनत और लगन का जीवंत प्रमाण है। यह गांव न केवल फौजियों को दे रहा है, बल्कि आईएएस और अन्य बड़े पदों पर भी यहां के युवा अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
गांव के अनोखे नियम
गुलियाणा की खासियत इसके सख्त और अनुशासित नियम हैं, जो युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए बनाए गए हैं। गांव में एक कमेटी गठित की गई है, जो इन नियमों का पालन सुनिश्चित करती है।
शराब पीकर हंगामा करने पर सख्त कार्रवाई होती है, और दो बोतल से अधिक शराब लाने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। शादी-समारोह में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी है। ये नियम युवाओं को अनुशासित जीवन जीने और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
रिटायर्ड फौजियों की मेहनत
गांव के रिटायर्ड सैनिकों ने युवाओं को सेना में भर्ती के लिए तैयार करने का बीड़ा उठाया है। बिना किसी सरकारी सहायता के, गांव की खाली जमीन पर 24 घंटे कठिन ट्रेनिंग दी जाती है।
सुबह की ठंड हो या दोपहर की गर्मी, रिटायर्ड फौजी युवाओं को फिजिकल टेस्ट पास करने के लिए कड़ी मेहनत करवाते हैं। इस ट्रेनिंग का असर साफ दिखता है, क्योंकि सैकड़ों युवा सेना में अपनी जगह बना चुके हैं। यह गांव आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सहयोग का शानदार उदाहरण है।
स्टेडियम की मांग
गुलियाणा के युवाओं की एक बड़ी मांग लंबे समय से अनसुनी पड़ी है। वे सरकार से गांव में एक स्टेडियम बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि स्टेडियम की सुविधा मिलने से और अधिक युवा सेना और अन्य क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकेंगे। गांव ने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया है, उसे और बुलंदियों तक ले जाने के लिए यह मांग जायज है।
प्रेरणा का स्रोत
गुलियाणा गांव हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो मानता है कि मेहनत और अनुशासन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। यह गांव न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है।
यहां के युवाओं का जुनून, गांव के नियम, और रिटायर्ड फौजियों का मार्गदर्शन इसे देशभक्ति की जीवंत प्रयोगशाला बनाता है। सरकार को चाहिए कि इस गांव की मांगों को गंभीरता से ले और इसे और बेहतर सुविधाएं प्रदान करे।










