चंडीगढ़ . हरियाणा में अब नवविवाहित जोड़ों को अपना मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह प्रमाण पत्र) बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों और बाबुओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नगर निगम ने आम आदमी की सहूलियत के लिए विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को 100 प्रतिशत ऑनलाइन, पेपरलेस और पारदर्शी बना दिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश भर के हजारों परिवारों का समय और पैसा दोनों बचेगा। अब कोई भी आवेदक सीधे अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर से दो बेहद आसान तरीकों से मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकता है।
OTP से घर बैठे बनेगा सर्टिफिकेट
मेयर प्रवीण पोपली, निगमायुक्त नीरज और जॉइंट कमिश्नर शालिनी चेतल ने इस नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अगर वर और वधू दोनों हरियाणा के स्थायी निवासी हैं और उनके माता-पिता जीवित हैं, तो वे पूरी तरह से ऑनलाइन OTP आधारित प्रणाली का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में माता-पिता के आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षित ओटीपी भेजा जाएगा। इसके बाद सभी जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड होंगे और ऑनलाइन वेरिफिकेशन पूरा होते ही तुरंत प्रभाव से विवाह प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
दूसरा विकल्प: ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और फिजिकल वेरिफिकेशन
जो लोग पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया नहीं अपनाना चाहते, उनके लिए नगर निगम ने दूसरा हाइब्रिड विकल्प भी खुला रखा है। इस विकल्प के तहत आवेदक को सबसे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरना होगा और अपने हिसाब से वेरिफिकेशन की एक तारीख तय करनी होगी। निर्धारित दिन और समय पर पति-पत्नी को निगम कार्यालय जाकर अपने ओरिजिनल दस्तावेजों की जांच करवानी होगी। कागजातों की सही जांच होते ही अधिकारियों द्वारा तुरंत मैरिज सर्टिफिकेट सौंप दिया जाएगा।
आवेदन के लिए जरूरी होंगे ये अहम दस्तावेज
मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने के लिए हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र (फैमिली आईडी) को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा वर-वधू की तीन 3×2 साइज की संयुक्त फोटो और शादी की रस्मों (फेरे, जयमाला, आशीर्वाद और सिंदूर) की चार अलग-अलग तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। पहचान प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र मान्य होगा। शादी के पक्के सबूत के लिए शादी का कार्ड, पंडित का शपथ पत्र या धार्मिक संस्था का प्रमाण पत्र और दो गवाहों के पहचान पत्र भी साथ लगाने होंगे। अगर शादी को 90 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, तो जोड़े को एक संयुक्त शपथ पत्र (एफिडेविट) भी जमा कराना होगा।
डाटा मिसमैच होने पर रद्द हो सकता है फॉर्म
निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आवेदन के वेरिफिकेशन के दौरान सबसे बड़ी बाधा दस्तावेजों में डाटा मिसमैच (Data Mismatch) होने की आती है। इसलिए आम आदमी को आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी दस्तावेजों में नाम और उम्र की जानकारी बिल्कुल एक समान हो। विशेष रूप से आधार कार्ड और स्कूल सर्टिफिकेट में नाम की स्पेलिंग और फैमिली आईडी में दर्ज जन्म तिथि का मिलान बेहद जरूरी है। सही जानकारी भरने से पूरी प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जल्द पूरी हो सकेगी।
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