सोनीपत. हरियाणा में रबी फसलों की मार्केटिंग का सीजन शुरू होते ही सरसों उत्पादक किसानों की चांदी हो गई है। सोनीपत जिले की गोहाना अनाज मंडी में सोमवार को बोली के दौरान एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना, जब गांव तिहाड़ मलिक के किसान विकास मलिक की सरसों की ढेरी 7,015 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदी गई। यह भाव इस सीजन में अब तक का सबसे ऊंचा दाम है। गौरतलब है कि भारत सरकार ने चालू विपणन सत्र के लिए सरसों का MSP 6,200 रुपये तय किया है, लेकिन मंडी में मिल रहे ऊंचे दामों ने सरकारी खरीद केंद्रों की चमक फीकी कर दी है।
निजी खरीदारों की सक्रियता और पेमेंट का ‘इंस्टेंट’ मॉडल
बाजार के मौजूदा हालातों पर नजर डालें तो हरियाणा की मंडियों में सरकारी एजेंसियों (HAFED और HAIC) के मुकाबले निजी व्यापारी अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं। रेवाड़ी, हिसार और सिरसा जैसी बड़ी मंडियों में भी सरसों के दाम 6,400 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल तक जा रहे हैं। किसानों के निजी हाथों में फसल बेचने का एक बड़ा कारण ‘नकद और तत्काल भुगतान’ है। सरकारी केंद्रों पर पोर्टल की तकनीकी खामियों और भुगतान में होने वाली देरी के डर से किसान ओपन मार्केट को तरजीह दे रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हालांकि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के जरिए आने वाले हर किसान को सुविधा दी जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर निजी क्षेत्र का दबदबा बना हुआ है।
40% तेल मात्रा पर टिकी नजरें
गोहाना मंडी के मार्केट कमेटी सचिव के अनुसार, जिन किसानों की सरसों में नमी की मात्रा कम (8% से नीचे) और तेल की मात्रा 40% से अधिक है, उन्हें व्यापारी हाथों-हाथ ऊंचे दामों पर खरीद रहे हैं। रिकॉर्ड भाव पाने वाले किसान विकास मलिक ने बताया कि उन्होंने फसल की सुखाने और सफाई पर विशेष ध्यान दिया था, जिसका परिणाम उन्हें 7,015 रुपये के भाव के रूप में मिला। मंडी प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल को पूरी तरह सुखाकर लाएं क्योंकि नमी वाली फसल पर 5,800 रुपये तक के कम भाव भी मिल रहे हैं।
गेहूं की खरीद और मंडियों में सुविधाएं
सरसों की आवक के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद भी शुरू होने जा रही है। सरकार ने इसके लिए 416 केंद्र स्थापित किए हैं। गोहाना सहित सभी मंडियों में किसानों के लिए अटल कैंटीन में 10 रुपये में थाली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। हालांकि, ई-खरीद पोर्टल के धीमे चलने और बारदाना (जूट बैग) की छिटपुट कमी की शिकायतों ने शुरुआती दिनों में कुछ मुश्किलें जरूर पैदा की हैं, जिन्हें दूर करने का दावा प्रशासन कर रहा है।
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