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कुदरत का ‘डबल अटैक’: ओलावृष्टि और आंधी से लहूलुहान हुआ अन्नदाता, 5 राज्यों में फसलों की तबाही

On: April 1, 2026 4:05 PM
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कुदरत का 'डबल अटैक': ओलावृष्टि और आंधी से लहूलुहान हुआ अन्नदाता, 5 राज्यों में फसलों की तबाही
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चंडीगढ़. मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में पड़ रही इस बेमौसम मार ने देश के कृषि बेल्ट को हिलाकर रख दिया है। एक ओर जहां किसान फसल काटकर घर ले जाने की तैयारी में था, वहीं मंगलवार और बुधवार को आए चक्रवाती सिस्टम ने खेतों में खड़ी सुनहरी फसल को मटियामेट कर दिया। हरियाणा के हिसार, भिवानी और गुरुग्राम से लेकर पंजाब के फाजिल्का तक, ओलों की ऐसी बौछार हुई कि फसलें झुक गईं। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि पककर तैयार गेहूं के पौधे जड़ से उखड़कर जमीन पर बिछ गए (Lodging), जिससे अब दाना काला पड़ने और पैदावार घटने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मंडियों में बदइंतजामी और किसानों का फूटा गुस्सा

फसल खराबे की खबरों के बीच मंडियों से आई तस्वीरों ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। हरियाणा और पंजाब की कई अनाज मंडियों में तिरपाल और ऊंचे चबूतरों की कमी के कारण किसानों की लाई गई उपज भीगकर खराब हो गई। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने गेहूं खरीद के लिए मुकम्मल इंतजाम नहीं किए, जिसके चलते खून-पसीने की कमाई कीचड़ में मिल गई। फाजिल्का के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गिरदावरी (नुकसान का सर्वे) कराकर मुआवजे का ऐलान नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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आगामी सप्ताह मैदानों में बारिश का साया

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। 2 अप्रैल को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं, जबकि 3 अप्रैल को भी हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता 4 और 5 अप्रैल को लेकर है, जब हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने का अनुमान है। इसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ेगा, जिससे पकी हुई फसलों में नमी बढ़ेगी और कटाई में 10 से 15 दिनों की देरी हो सकती है। फिलहाल नांदेड़ सहित कई जिलों में गुरुवार तक ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।

पशुहानि और बागवानी को झटका

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मौसम ने एक ही दिन में दो रंग दिखाए। वर्धा और नागपुर में जहां दोपहर का पारा 41.6 डिग्री सेल्सियस के पार था, वहीं शाम को हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी। नांदेड़ जिले में स्थिति और भी भयावह रही, जहां सोमवार रात चली तूफानी हवाओं ने आम, खरबूजे और तरबूज के बागों को तहस-नहस कर दिया। अर्धापुर तालुका के लहान गांव में बिजली गिरने से एक दुधारू गाय की मौत हो गई, जिससे गरीब किसान पर दोहरी मार पड़ी है। कटाई के बाद खुले में रखे हल्दी के स्टॉक और गर्मियों की ज्वार की फसल भी इस बारिश की भेंट चढ़ गई है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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