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हरियाणा चावल निर्यात: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच निर्यातकों को मिली 60 करोड़ की बड़ी राहत

On: March 31, 2026 4:56 PM
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हरियाणा चावल निर्यात: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच निर्यातकों को मिली 60 करोड़ की बड़ी राहत
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करनाल. हरियाणा के बासमती चावल उद्योग पर मंडरा रहे अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी वाले समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, जिससे हरियाणा से होने वाला चावल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

इस स्थिति ने राज्य के निर्यातकों के सामने नकदी का संकट खड़ा कर दिया था, क्योंकि करोड़ों रुपये का माल या तो कांडला बंदरगाह पर खड़ा है या विदेशी तटों पर अटका पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने लगभग 497 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत हरियाणा के निर्यातकों को 60 करोड़ रुपये की तात्कालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने की मंजूरी दी है।

डिटेंशन शुल्क से मिली बड़ी राहत

हरियाणा भारत के उन प्रमुख राज्यों में शुमार है जो दुनिया को बेहतरीन बासमती चावल सप्लाई करते हैं। विशेष रूप से खाड़ी देशों (Gulf Countries) में भारतीय चावल की कुल खपत का 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा के निर्यातकों द्वारा भेजा जाता है। मौजूदा तनाव के कारण जहाजों के मार्ग बदलने और माल की डिलीवरी में देरी होने से बंदरगाहों पर खड़े कंटेनरों का ‘डिटेंशन शुल्क’ (विलंब शुल्क) बढ़ता जा रहा था।

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सरकार ने कांडला पोर्ट पर रुके हुए स्टॉक के लिए इस शुल्क को पूरी तरह माफ करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, विदेशी बंदरगाहों पर फंसी खेपों पर लगने वाले अतिरिक्त शिपिंग चार्जेस में भी छूट दी गई है, जिससे निर्यातकों की परिचालन लागत में कमी आएगी।

भुगतान के संकट पर नजर

युद्ध की आहट ने केवल लॉजिस्टिक्स को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग चैनलों के माध्यम से होने वाले भुगतान (Payments) को भी अनिश्चित बना दिया है। हरियाणा के करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र जैसे चावल हब के सैकड़ों निर्यातकों का पैसा ईरान और पड़ोसी देशों में अटक गया है।

सरकारी सहायता का उद्देश्य इस कठिन समय में उद्योग को ‘वर्किंग कैपिटल’ उपलब्ध कराना है ताकि जैसे ही वैश्विक स्थिति सामान्य हो, व्यापार फिर से अपनी पुरानी गति पकड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो निर्यातकों को अफ्रीकी और यूरोपीय बाजारों की ओर रुख करना पड़ सकता है, जिसके लिए सरकार वैकल्पिक व्यापार समझौतों पर भी विचार कर रही है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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