चंडीगढ़. हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने राज्य की दो बिजली वितरण कंपनियों, UHBVN और DHBVN को कृषि क्षेत्र में बिजली की बर्बादी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के लाखों ट्यूबवेल कनेक्शनों पर बिना मीटर के बिजली देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह केंद्र सरकार की “सब्सिडी अकाउंटिंग” प्रक्रिया के भी खिलाफ है। कमीशन ने डिस्कॉम को अगले 3 महीनों के भीतर एक ऐसी विस्तृत योजना सौंपने को कहा है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हर खेत में लगा पंप मीटर के दायरे में हो। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बिजली की वास्तविक खपत का सटीक आकलन करना और सब्सिडी के बोझ को पारदर्शी बनाना है।
7870 करोड़ की सब्सिडी और ‘फ्री’ बिजली का गणित
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी नए टैरिफ ऑर्डर के अनुसार, हरियाणा सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए 7,870.32 करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी आवंटित की है। वर्तमान में एक किसान को बिजली की आपूर्ति करने की वास्तविक लागत 7.48 रुपये प्रति यूनिट बैठती है, लेकिन सब्सिडी के कारण किसान को केवल 10 पैसे प्रति यूनिट का भुगतान करना पड़ता है। कमीशन ने पाया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) में 2,158 मिलियन यूनिट और दक्षिण हरियाणा (DHBVN) में 1,758 मिलियन यूनिट बिजली बिना मीटर के खर्च हो रही है। यह अंतर बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान (T&D Losses) को छिपाने का जरिया बन जाता है, जिसे अब मीटरिंग के जरिए नियंत्रित किया जाएगा।
किसानों को राहत: लोड बढ़ाने का सुनहरा मौका
एक तरफ जहां मीटरिंग को लेकर सख्ती दिखाई गई है, वहीं किसानों को एक बड़ी राहत भी दी गई है। कमीशन ने निर्देश दिया है कि जिन किसानों ने 31 दिसंबर 2023 तक 10 BHP तक के ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया था, उन्हें अपनी सीनियरिटी खोए बिना अपना लोड बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। यह विशेष सुविधा 31 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा, हरियाणा सरकार ने किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक अलग कंपनी ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ (Haryana Agri Discom) बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जो केवल राज्य के 5,084 कृषि फीडरों और करीब 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं की देखभाल करेगी।
क्या खत्म होगा फ्लैट रेट का सिस्टम?
वर्तमान में हरियाणा के अधिकांश हिस्सों में ट्यूबवेल कनेक्शनों का बिल पंप की हॉर्स पावर (HP) के आधार पर ‘फ्लैट रेट’ से लिया जाता है। मीटर लगने के बाद, इस व्यवस्था को पूरी तरह से खपत आधारित (Metered Billing) किया जा सकता है। इसका सीधा असर उन बड़े किसानों पर पड़ेगा जो अत्यधिक पानी और बिजली का उपयोग करते हैं। हालांकि, छोटे किसानों के लिए सब्सिडी बरकरार रहेगी, लेकिन मीटरिंग के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दी जाने वाली सब्सिडी का हर पैसा सही जगह इस्तेमाल हो रहा है।
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