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फसल नुकसान का मुआवजा: 72 घंटे में करें यह काम, वरना नहीं मिलेगा बीमा क्लेम

On: मार्च 29, 2026 5:01 अपराह्न
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फसल नुकसान का मुआवजा: 72 घंटे में करें यह काम, वरना नहीं मिलेगा बीमा क्लेम
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हिसार. उत्तर भारत के बड़े हिस्से में अचानक हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में सरसों और गेहूं की खड़ी फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है। इस संकट को देखते हुए राज्य सरकारों ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया है, उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। हालांकि, मुआवजे की पात्रता के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि फसल खराब होने के 72 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों या बीमा कंपनी को सूचित करना होगा।

मुआवजे के लिए पंजीकरण और प्रीमियम की शर्तें

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी फसलों के लिए किसानों को केवल 1.5% प्रीमियम देना होता है, जबकि खरीफ के लिए 2% और नकदी फसलों के लिए 5% का प्रावधान है। राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, सरकार ने कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी गई फसल (Post-harvest loss) पर भी मुआवजे का भरोसा दिया है। जिन किसानों ने बैंक से ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) के जरिए लोन लिया है, उनका बीमा बैंक द्वारा स्वतः कर दिया जाता है। इसके उलट, गैर-ऋणी किसानों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या PMFBY पोर्टल के माध्यम से स्वयं पंजीकरण कराना होता है।

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क्लेम के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया

मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ‘क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट’ के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाता है। किसानों को आवेदन के समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, खतौनी (जमीन के कागजात) और बुआई प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। यदि किसान बटाई पर खेती कर रहा है, तो उसे भूस्वामी के साथ हुआ अनुबंध पत्र देना अनिवार्य है। सूचना देने में देरी होने पर क्लेम खारिज होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1447 जारी किया है ताकि दूर-दराज के किसान भी समय पर रिपोर्ट दर्ज करा सकें।

तकनीक से आसान हुई राह

डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ अब किसान केवल कॉल ही नहीं, बल्कि PMFBY चैटबॉट और ‘क्रॉप इंश्योरेंस ऐप’ के माध्यम से भी अपने नुकसान की तस्वीरें और जानकारी साझा कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि नुकसान के भौतिक सत्यापन के बाद जल्द से जल्द क्लेम राशि सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों (DBT) में हस्तांतरित की जाए। वर्तमान में मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और बीमा पोर्टल पर अपनी पॉलिसी की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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