चंडीगढ़. हरियाणा की सियासत में राज्यसभा की दो खाली हो रही सीटों के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। निर्वाचन आयोग के शेड्यूल के मुताबिक 16 मार्च को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी, जिसके लिए प्रत्याशी 5 मार्च तक अपना पर्चा दाखिल कर सकते हैं। भाजपा ने इस बार करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना चेहरा बनाकर सबको चौंका दिया है। भाटिया 2019 में रिकॉर्ड मतों से सांसद बने थे, लेकिन 2024 में उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उतारा गया था।
सीटों का समीकरण और आंकड़ों का खेल
मौजूदा विधानसभा की स्थिति को देखें तो एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 31 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस और भाजपा दोनों के पाले में एक-एक सीट जाने की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है। फिलहाल भाजपा के पास 47 विधायक हैं और उन्हें तीन निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है, जो एक सीट पर जीत के लिए पर्याप्त है। वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो दूसरी सीट पर उनकी जीत का रास्ता साफ कर रहे हैं।
क्रॉस वोटिंग की संभावना और सियासी चुनौती
भाजपा को दूसरी सीट हथियाने के लिए विपक्षी खेमे में बड़ी सेंधमारी की जरूरत होगी। जानकारों का मानना है कि भाजपा दूसरी सीट तभी जीत सकती है जब कांग्रेस के कम से कम 7 विधायक क्रॉस वोटिंग करें। हालांकि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में इस तरह की बड़ी बगावत की संभावना काफी कम नजर आ रही है। यह चुनाव रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी के कार्यकाल के 9 अप्रैल को खत्म होने की वजह से हो रहे हैं।
आम आदमी पर प्रभाव और राजनीतिक संदेश
राज्यसभा में जाने वाले प्रतिनिधि सीधे तौर पर प्रदेश के विकास और मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखते हैं। संजय भाटिया जैसे अनुभवी जमीनी नेता का सदन में जाना हरियाणा के विकास कार्यों को नई गति दे सकता है। राजनीतिक रूप से यह कदम भाटिया के समर्थकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लोकसभा चुनाव के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयास लगा रहे थे।
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