चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने रोडवेज बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाकर परिवहन सेवा को हाई टेक बना दिया है। भिवानी की 220 बसों में इसकी शुरुआत हुई है जिससे यात्रियों को लाइव ट्रैकिंग और सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने वाली है। राज्य सरकार ने यात्रियों के सफर को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए रोडवेज की बसों को आधुनिक तकनीक से लैस करना शुरू कर दिया है। अब यात्रियों को बस स्टैंड पर घंटों इंतजार नहीं करना होगा क्योंकि उन्हें बस की सटीक लोकेशन और आने का समय पहले ही पता चल जाएगा।
भिवानी डिपो से हुई हाई टेक शुरुआत
सरकार ने परिवहन सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के तहत भिवानी डिपो की 220 बसों को व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) से जोड़ दिया गया है।
यह सिर्फ एक शुरुआत है और धीरे धीरे पूरे प्रदेश में इस मॉडल को लागू किया जा सकता है। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब बसों का संचालन पूरी तरह पारदर्शी होगा और यात्रियों को रियल टाइम जानकारी मिलती रहेगी।
एलईडी स्क्रीन पर दिखेगा बस का पूरा रूट
अक्सर यात्रियों को यह चिंता रहती है कि उनकी बस कब आएगी या कहीं छूट तो नहीं गई। इस समस्या का समाधान करते हुए विभाग ने बस स्टैंड पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने की व्यवस्था की है। इन स्क्रीन्स पर निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध होगी:
बस की वर्तमान लोकेशन
बस पहुंचने का अनुमानित समय
बस का पूरा रूट और स्टॉपेज
रास्ते में बस खराब होने पर मिलेगी तुरंत मदद
सफर के दौरान बस खराब हो जाना यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होता था। कई बार सुनसान रास्तों पर घंटों तक दूसरी बस का इंतजार करना पड़ता था। नए ट्रैकिंग सिस्टम के आने से कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल जाएगा कि बस किस लोकेशन पर रुकी है।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम से विभाग को यह पता चलेगा कि बस कहां खराब हुई है और वहां के सबसे नजदीकी डिपो से तुरंत दूसरी बस या मैकेनिक भेजा जा सकेगा। इससे यात्रियों का कीमती समय बर्बाद नहीं होगा।
क्या है व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और इसके फायदे
व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम यानी VTS एक जीपीएस आधारित तकनीक है जो उपग्रह की मदद से वाहनों पर नजर रखती है। यह केवल लोकेशन ही नहीं बताता बल्कि बस की गति और ड्राइवर के व्यवहार को भी मॉनिटर करता है।
इस सिस्टम के प्रमुख फायदे:
सुरक्षा में बढ़ोतरी: अगर कोई बस निर्धारित रूट से अलग जाती है या ओवरस्पीडिंग करती है तो तुरंत अलर्ट जारी होगा।
ईंधन की बचत: बसों के सही संचालन और मॉनिटरिंग से फ्यूल चोरी रुकेगी और माइलेज बेहतर होगी।
बेहतर प्रबंधन: अधिकारियों के पास हर बस का डिजिटल डेटा मौजूद रहेगा जिससे भविष्य की नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार का विजन और भविष्य की राह
हरियाणा सरकार का यह कदम स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन की दिशा में एक मील का पत्थर है। तकनीकी जानकारों के अनुसार जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट भरोसेमंद और समय का पाबंद होता है तो लोग निजी वाहनों को छोड़कर बसों में सफर करना पसंद करते हैं।
इससे सड़कों पर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आती है। भिवानी डिपो में यह प्रयोग सफल होने के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा।











