Karwa Chauth 2025 Kurukshetra mein chand nikalne ka samay: हरियाणा की महिलाएं करवा चौथ का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है। यह पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और दाम्पत्य जीवन में प्रेम का प्रतीक है। भारत में त्योहार सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने का एक खूबसूरत मौका होते हैं। कुरुक्षेत्र में चांद कब दिखेगा और पूजा की पूरी विधि जानकारी हम आपको बता रहे हैं।
करवा चौथ भी ऐसा ही पर्व है, जिसे महिलाएं पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं। इस दिन सुबह से निर्जला व्रत रखा जाता है और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। साल 2025 में करवा चौथ का शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन का समय खास महत्व रखता है, क्योंकि सही समय पर पूजा करने से व्रत का फल और भी शुभ माना जाता है।
Karwa Chauth 2025: चंद्रमा का विशेष महत्व
करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही इसे खोलती हैं। पूजा में भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की आराधना की जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त है, इसलिए उनकी पूजा से सुहागिन महिलाओं को सात जन्मों तक सुखी दाम्पत्य जीवन मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था कि जो उसे सीधे देखेगा, उसे अपमान का सामना करना पड़ेगा। इसीलिए महिलाएं चंद्रमा को छलनी के माध्यम से देखती हैं। छलनी में जलता दीपक भी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और व्रत को शुभ बनाता है।
करवा चौथ 2025: Kurukshetra mein chand nikalne ka samay
साल 2025 में करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर होगा, जो रात 10:54 बजे शुरू होकर अगले दिन शाम 7:38 बजे खत्म होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा रात 8:13 बजे उदय होगा, और यही व्रत खोलने का सबसे शुभ समय माना जाएगा।
करवा चौथ की पूजा विधि
करवा चौथ की पूजा को सही तरीके से करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सरगी ग्रहण करें। पूजा के लिए एक साफ थाली में दीपक, गंगाजल, अक्षत, सिंदूर, हल्दी, फूल, गुड़, दूध, फल और दही रखें। शुभ मुहूर्त में व्रत का संकल्प लें और कलश में जल भरकर उसका पूजन करें। भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्र देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक जलाएं, धूप और आरती करें। फल, हल्दी, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य चढ़ाएं। शाम को करवा चौथ की कथा सुनें। चंद्रमा के दर्शन होने पर उसे गंगाजल, दूध या शुद्ध जल अर्पित करें। छलनी के माध्यम से पहले चंद्रमा और फिर पति को देखें। इसके बाद पति के हाथों से पहला निवाला लेकर व्रत पूरा करें।











