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Palwal में Ahoi Ashtami 2025 पर कितने बजे निकलेगा चांद? जानें शुभ मुहूर्त

On: अक्टूबर 10, 2025 8:09 अपराह्न
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Palwal में Ahoi Ashtami 2025 पर कितने बजे निकलेगा चांद? जानें शुभ मुहूर्त
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Palwal mein Ahoi Ashtami 2025 par chand kab niklega aaj: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत माताओं के लिए बेहद खास होता है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस साल अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और माता अहोई की पूजा कर तारों को अर्घ्य देंगी। आइए जानते हैं इस व्रत की तारीख, शुभ मुहूर्त और इसका महत्व।

अहोई अष्टमी 2025 की तारीख

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर, सोमवार को पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर को दोपहर 12:24 बजे शुरू होगी और 14 अक्टूबर को सुबह 11:09 बजे समाप्त होगी। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत और पूजा करेंगी।

Palwal में Ahoi Ashtami 2025 पर कितने बजे निकलेगा चांद?

अहोई अष्टमी की पूजा का सबसे शुभ समय शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। यह मुहूर्त करीब 1 घंटे 15 मिनट का होगा। इसके बाद तारों को अर्घ्य देने का समय शाम 6:28 बजे से शुरू होगा। कुछ जगहों पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है, जिसके लिए चंद्रोदय रात 11:40 बजे होगा। इस समय महिलाएं व्रत का पारण करेंगी।

क्यों खास है यह व्रत?

अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से आठ दिन पहले आता है। जैसे करवा चौथ में पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा जाता है, वैसे ही अहोई अष्टमी संतान की दीर्घायु के लिए समर्पित है। उत्तर भारत में इस व्रत को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। माताएं सुबह से निर्जला व्रत शुरू करती हैं और पूरे दिन बिना पानी या भोजन के माता अहोई की पूजा करती हैं।

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अहोई अष्टमी की रस्में

अहोई अष्टमी का व्रत बहुत ही कठिन होता है। माताएं पूरे दिन बिना पानी और भोजन के उपवास रखती हैं। ये निर्जला व्रत शाम को तारा देखने के बाद खोला जाता है। कुछ जगहों पर चांद देखकर भी व्रत खोला जाता है, लेकिन इस दिन चांद देर से निकलता है, इसलिए तारा देखना ज्यादा प्रचलित है।

महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और अपने बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं। सूर्यास्त से पहले पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। दीवार पर अहोई माता और उनके आठ बच्चों का चित्र बनाया जाता है, जिसमें ‘अष्ट कोष्ठक’ यानी आठ कोनों का ध्यान रखा जाता है। इसके साथ ही ‘सेई’ (हेजहॉग और उसके बच्चों) का चित्र भी बनाया जाता है। अगर चित्र बनाना संभव न हो तो अहोई अष्टमी का वॉलपेपर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चित्र में सात बेटों और उनकी बहुओं को भी दर्शाया जाता है, जैसा कि व्रत कथा में बताया गया है।

अहोई अष्टमी की व्रत कथा

कहानी के अनुसार, बहुत समय पहले एक साहूकार अपने सात बेटों के साथ एक शहर में रहता था। दीवाली से सात दिन पहले, जब घर की साफ-सफाई चल रही थी, साहूकार की पत्नी नदी के पास खुले गड्ढे से मिट्टी लेने गई। उसे नहीं पता था कि वहां एक सेई (हेजहॉग) का घोंसला है। मिट्टी खोदते समय उसकी कुदाल से सेई का एक बच्चा मर गया।

इस घटना से साहूकार की पत्नी बहुत दुखी हुई। वह उदास मन से घर लौट आई। कुछ दिनों बाद, सेई के श्राप के कारण, उसका सबसे बड़ा बेटा मर गया, फिर दूसरा, तीसरा, और इस तरह एक साल में उसके सातों बेटे चल बसे। अपने बच्चों की मौत से वह बहुत दुखी रहने लगी।

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एक दिन, रोते हुए उसने अपनी पड़ोसन को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई और बताया कि उसने अनजाने में सेई के बच्चे को मार दिया था, और इसके बाद उसके सातों बेटे चले गए। पड़ोसन ने उसे सांत्वना दी और कहा कि पश्चाताप करने से उसका आधा पाप कम हो चुका है। उसने सलाह दी कि अहोई अष्टमी के दिन भगवती अहोई माता की पूजा करें, सेई और उसके बच्चों का चित्र बनाएं, और अपनी गलती के लिए माफी मांगें। ऐसा करने से भगवान की कृपा से उसके सारे पाप धुल जाएंगे।

साहूकार की पत्नी ने पड़ोसन की सलाह मानी और कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को व्रत और पूजा शुरू की। उसने हर साल नियमित रूप से ये व्रत रखा, और समय के साथ उसे फिर से सात बेटे प्राप्त हुए। तभी से अहोई अष्टमी व्रत की परंपरा शुरू हुई।

अहोई अष्टमी की तारीखें (2020-2030)

2020: 8 नवंबर, रविवार
2021: 28 अक्टूबर, गुरुवार
2022: 17 अक्टूबर, सोमवार
2023: 5 नवंबर, रविवार
2024: 24 अक्टूबर, गुरुवार
2025: 13 अक्टूबर, सोमवार
2026: 1 नवंबर, रविवार
2027: 22 अक्टूबर, शुक्रवार
2028: 11 अक्टूबर, बुधवार
2029: 30 अक्टूबर, मंगलवार
2030: 19 अक्टूबर, शनिवार

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व

इस दिन माताएं माता अहोई की पूजा कर अपने बच्चों के लिए लंबी उम्र और सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि यह व्रत संतान को हर तरह की बाधाओं से बचाता है। निसंतान महिलाएं भी इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए रखती हैं। शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है, जिससे माता अहोई का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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