Property Mutation Delay (हिसार) : प्रॉपर्टी की ई-रजिस्ट्री (ऑनलाइन) होने के बाद भी जिले की 9 तहसीलों में हजारों की संख्या में इंतकाल (म्यूटेशन) पेंडिंग हैं। इंतकाल दर्ज कराने के लिए लोग तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। कहीं कंप्यूटर में दर्ज न होने तो कहीं अधिकारियों के पास पेंडिंग होने से इंतकाल ही नहीं बन पा रहे हैं। आलम यह है कि जिले भर की तहसीलों में करीब 17 हजार 277 और हिसार तहसील में सर्वाधिक करीब 6 हजार 313 और हांसी तहसील में 5975 इंतकाल पेंडिंग हैं।
लोग चक्कर लगा कहीं रजिस्ट्री कंप्यूटर में दर्ज होने में देरी, तो कहीं संबंधित अधिकारी और पटवारी के पास होती है देरी इसी के मद्देनजर डीसी अनीश यादव ने तीन दिन पहले जिले के राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों, तहसीलदारों नायब तहसीलदारों को अपने-अपने आफिस के सभी पेंडिंग इंतकाल दर्ज करने के निर्देश जारी किए थे।
इंतकाल में देरी से क्या नुकसान?
इंतकाल न होने से मालिकाना हक के दस्तावेजीकरण में गड़बड़ी, प्रॉपर्टी को बेचने या गिरवी रखने में समस्या, कानूनी उलझनों और विवादों का खतरा रहता है, साथ हैं। जिले में हर रोज तहसीलों में ही करीब 300 से अधिक जमीनों की रजिस्ट्रियां होती हैं।
नियम है कि रजिस्ट्री के 13 वर्किंग डे में इंतकाल भी हो जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। महीनों से लोगों के इंतकाल पेंडिंग टैक्स संबंधी दिक्कतें भी आ सकती है। इसके अलावा, सरकार द्वारा किसी प्रोजेक्ट के लिए प्रॉपर्टी अधिग्रहित करने पर आपको उचित मुआवजा नहीं मिल पाता है और समय व पैसे की बर्बादी होती है।
कहां कितने इंतकाल अटके?
हिसार तहसील में 6,313 इंतकाल पेंडिंग हैं, जिनमें 5,435 कंप्यूटर ऑपरेटर और 878 अधिकारी-पटवारी के पास हैं। हांसी में 5,975 इंतकाल लटके हैं, जिनमें 5,486 ऑपरेटर और 489 अन्य कर्मियों के पास हैं। बरवाला में 1,427, आदमपुर में 655, बास में 343, खेड़ी में 367, नारनौंद में 773, बालसमंद में 549 और उन में 875 इंतकाल पेंडिंग हैं।
इंतकाल की प्रक्रिया
तहसील में रजिस्ट्री होने के बाद इंतकाल की प्रक्रिया में सबसे पहले कंप्यूटर आपरेटर की भूमिका होती है। ऑपरेटर रजिस्ट्री को ऑनलाइन करेगा। इसके बाद पटवारी फिर कानूनों उसके बाद तहसीलदार इंतकाल पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद जमीन खरीद करने वाले का नाम सरकारी रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा।
नहीं हो रहे इंतकाल, लोग हो रहे परेशान
हिसार तहसील में पिछले डेढ़ जमाबंदी तैयार की जा रही है। इसलिए इंतकाल की साल से इंतकाल दर्ज होने की प्रक्रिया बंद है। यही वजह पेंडेंसी बढ़ रही है। जमाबंदी है कि हिसार तहसील में का काम पूरा होते ही इंतकाल सर्वाधिक 6 हजार 313 के की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
यही हाल हिसार की और हांसी की कमोवेश हांसी तहसील का जमावंदिया लगभग तैयार हो है। यहां 5975 इंतकाल अभी चुकी है। प्रिंट आने वाली पेंडिंग है। राजस्व विभाग के बाकी रह है। जल्द इस अधिकारियों का कहना कि प्रक्रिया में तेजी आएगी।
इंतकाल में देरी होने से बढ़ रहा फर्जीवाड़ा
जमीन जायदाद के मामलों में रोजाना धोखाधड़ी – फर्जीवाड़े के मामले सामने आते हैं। एक-एक प्लॉट को कई कई खरीदारों को बेचकर लोगों को ठगा जा रहा है। पुलिस ऐसे मामलों में हर माह 1-2 एफआईआर दर्ज कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर रजिस्ट्री होते ही प्लॉट या अन्य प्रॉपर्टी का इंतकाल दर्ज किए जाएं तो फर्जीवाड़े संभावना काफी हद तक खत्म हो जाती है।
प्रॉपर्टी क्रेता रामप्रकाश कहते हैं कि अब तक जमीन का इंतकाल दर्ज नहीं किया गया। कभी पटवारी नहीं मिलता। अधिकारी अगले हफ्ते करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। हर हफ्ते चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
प्रापर्टी खरीददार वेदप्रकाश ने बताया कि मैंने करीब डेढ़ साल पहले एक प्लॉट खरीदा था और तहसील में रजिस्ट्री कराई थी, लेकिन आज तक मेरे नाम प्लॉट का इंतकाल दर्ज नहीं हो सका है। जिम्मेदार बार-बार चक्कर कटवा रहे हैं। कभी कहते हैं तहसीलदार साहब नहीं आए। कभी कहते हैं सिस्टम नहीं चल रहा।
डीसी हिसार अनीश यादव का कहना है कि इंतकाल और राजस्व संबंधी मामलों के शीघ्र निपटान के निर्देश दिए हैं। तहसीलों में इंतकाल की पेंडेसी ज्यादा हो रही है। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इस पेंडेसी को निपटान के निर्देश दिए हैं। ताकि लोगों को दिक्कत न हो।













