करनाल (Revenue Terminology)। ‘बैनामा मकान एक आबादी देह करनाल नगर निगम फरीक अव्वल द्वारा फरीक दोयम को दिया जाता है, इसके बदले में मुबलिग इतने रुपये हुआ है। मकान भार व तनाजा से मुक्त है।’ रजिस्ट्री में लिखा ये वाक्य पढ़कर आप कन्फ्यूज हो गए ना? ज्यादातर लोग तो इसे समझ भी नहीं पाते। अब सरकार ने इसे आसान बनाने की ठान ली है। राजस्व शब्दावली में तरमीम यानी संशोधन शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में जमीन की नई रजिस्ट्री में बैनामा की जगह विक्रय पत्र, आबादी देह की जगह बसा हुआ क्षेत्र, फरीक अव्वल-दोयम की जगह पहला-दूसरा पक्ष, मुबलिग की जगह रकम और बार व तनाजा से मुक्त की जगह सभी झगड़े-विवाद से मुक्त लिखा जाएगा।
अरबी-फारसी शब्दों का बाहर जाना
राजस्व शब्दावली से अरबी, फारसी और उर्दू के शब्दों को पूरी तरह बाहर किया जाएगा। ऐसे करीब 900 से ज्यादा शब्द हैं जो राजस्व रिकॉर्ड्स में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन आम आदमी को इनका मतलब तक नहीं पता। इनकी जगह हिंदी और अंग्रेजी से आए हिंदी शब्दों का यूज होगा। हिंदी एक्सपर्ट्स भी सरकार के इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं। उनका कहना है कि मातृभाषा में शब्दों का खजाना है, पुरानी राजस्व शब्दावली लाने और समझने वालों का जमाना चला गया। आज भी ज्यादातर लोग रजिस्ट्री और राजस्व दस्तावेज समझ नहीं पाते। नई जनरेशन के लिए ये भाषाई बदलाव जरूरी है। पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद ये सरकार का अगला बड़ा स्टेप होगा।
बदलाव ना हुआ तो 50 साल बाद कौन समझेगा: डॉ. प्रवीण
पंडित चिंरजीलाल शर्मा राजकीय पीजी कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. प्रवीण भारद्वाज कहते हैं कि हिंदी शब्दकोश के शब्द समझना बहुत आसान है। राजस्व विभाग में अभी जो शब्द चल रहे हैं, उनका युग खत्म हो चुका है। जब ये शब्द कागजों में आए थे, तब ये आम बोलचाल में थे। अब ना तो लाने वाले बचे, ना समझने वाले। सिर्फ राजस्व अफसर, कर्मचारी या डीड राइटर ही इन्हें जानते हैं। आम आदमी को संशोधन कराना हो तो भी इन्हीं पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर अब बदलाव नहीं हुआ तो 40-50 साल बाद की पीढ़ी इन दस्तावेजों को कैसे समझेगी।
पुराने शब्दों से होती है ठगी: विनय
इतिहास के प्रोफेसर विनय बताते हैं कि 16वीं सदी में मुगल बादशाह अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल ने जमीन रिकॉर्ड के लिए फारसी शब्द शुरू किए थे। ब्रिटिश राज ने भी इन्हें जारी रखा। आज भी वही शब्द जमीन के कागजात में चल रहे हैं। वाहिब, मुतबन्ना, माहूना, मालगुजारी, वसीका, रफा-ए-आम, तरमीम, जद्दी, बारानी, फरीक अव्वल जैसे शब्द आमजन की समझ से बाहर हैं। इसी वजह से लोगों के साथ धोखाधड़ी होती है।
पुराने शब्दों का हिंदी मतलब क्या?
अरबी-फारसी शब्द और उनका हिंदी अर्थ कुछ इस तरह है: बैनामा मतलब विक्रय पत्र, मुख्तयारनामा मतलब अधिकारपत्र (पॉवर ऑफ अटॉर्नी), इकरारनामा मतलब सहमतिपत्र, वसीयतनामा मतलब इच्छापत्र, दस्तबरदारी नामा मतलब हक छोड़ना या ट्रांसफर, इंतकाल मतलब मालिकाना हक बदलना, मकबूजा मतलब अधिकृत, गैर मकबूजा मतलब लावारिस, जायदाद मुंतकिल मतलब जमीन ट्रांसफर, मुबलिग मतलब रकम, तरमीम मतलब संशोधन, फरीक अव्वल मतलब प्रथम पक्ष, फरीक दोयम मतलब द्वितीय पक्ष, पड़त पटवार मतलब पटवारी का रिकॉर्ड, पड़त सरकार मतलब सरकार का रिकॉर्ड, मुवाहिब मतलब दान करने वाला, मोहूबदूला मतलब दान लेने वाला, आबादी देह मतलब बसा हुआ क्षेत्र, रहन बाकब्जा मतलब कब्जे के साथ गिरवी, बार व तनाजा मुक्त मतलब झगड़े व विवाद से मुक्त।
पहले से हो रहा बदलाव
40 साल पहले की रजिस्ट्री की तुलना करें तो आज कई अरबी-फारसी शब्द हट चुके हैं। डीड राइटरों ने खुद कई शब्द बंद कर दिए, नए अफसरों ने बदलाव किए। अब राजस्व रिकॉर्ड में बचे फारसी-अरबी शब्दों को हटाने के सरकार के साफ निर्देश हैं। हिंदी और प्रचलित शब्दों से प्रोसेस आसान हो जाएगी। – राजेश खुराना, तहसीलदार करनाल।













