Rohtak: Municipal Corporation employees protest with black flags, siege of CM residence if demands are not met: रोहतक में नगर निगम कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। काले झंडे थामे कर्मचारियों ने लघु सचिवालय के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और डीडीपीओ राजपाल चहल को मांग पत्र सौंपा।
अगर मांगें पूरी न हुईं, तो 20 मई को मुख्यमंत्री नायब सैनी के कुरुक्षेत्र आवास का घेराव करने की चेतावनी दी गई है। आइए, इस आंदोलन की पूरी कहानी जानते हैं।
कर्मचारियों का गुस्सा
नगर पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले रोहतक के नगर निगम कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपनी अनसुनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने का फैसला किया। सुबह कर्मचारी नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा हुए और साढ़े 11 बजे काले झंडे लेकर लघु सचिवालय की ओर रवाना हुए।
नारेबाजी करते हुए उन्होंने सरकार से मांग पत्र स्वीकार करने की मांग की। डीडीपीओ राजपाल चहल ने कर्मचारियों से मांग पत्र लिया और उनकी बात सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारी वापस लौट गए।
मांगों का पृष्ठभूमि
नगर निगम इकाई के प्रधान शंभू ने बताया कि 7 अगस्त 2024 को सरकार और नगर पालिका कर्मचारी संघ के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बनी थी। हालांकि, सरकार ने अभी तक इन वादों को पूरा नहीं किया।
इससे नाराज कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू करने का फैसला किया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने हाल ही में रोहतक में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में इस मुद्दे को उठाया और आंदोलन की रणनीति तैयार की।
आंदोलन की रूपरेखा
कर्मचारियों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की योजना बनाई है। 2 मई को पूरे प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों के कर्मचारियों ने काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया और सरकार को मांग पत्र सौंपे। आगामी 13 और 14 मई को शहरों में उल्टा झाड़ू लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।
16 मई को एक दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल होगी। अगर इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 20 मई को कर्मचारी कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सैनी के आवास का घेराव करेंगे।
मांग पत्र में क्या?
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों, जैसे वेतन वृद्धि, नियमितीकरण, और बेहतर कार्य स्थितियों को नजरअंदाज किया है। मांग पत्र में इन सभी मुद्दों को विस्तार से उठाया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार समझौते के बावजूद उनकी समस्याओं को हल करने में गंभीर नहीं है। यह आंदोलन उनकी एकजुटता और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश को दर्शाता है।
कर्मचारियों की एकजुटता
रोहतक में हुए इस प्रदर्शन ने कर्मचारियों की एकता को सामने लाया है। काले झंडे और नारेबाजी के जरिए उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की।
डीडीपीओ राजपाल चहल ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाई जाएंगी। हालांकि, कर्मचारी इस बार ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी, तो आंदोलन और तेज होगा।
निष्कर्ष: कर्मचारियों की पुकार
रोहतक में नगर निगम कर्मचारियों का यह प्रदर्शन उनकी अनसुनी मांगों और सरकार की उदासीनता के खिलाफ एक बड़ा कदम है।
काले झंडे और मांग पत्र के जरिए उन्होंने अपनी बात रखी है, और अब गेंद सरकार के पाले में है। 20 मई को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव से पहले क्या सरकार उनकी मांगों को पूरा करेगी? यह सवाल हर किसी के मन में है। कर्मचारियों की यह लड़ाई न केवल उनके हक की है, बल्कि यह बेहतर कार्य परिस्थितियों और सम्मान की मांग भी है।










