Panipat News, (पानीपत) : पानीपत की एक मां ने अपनी नाबालिग बेटी को न्याय दिलाने के लिए 28 महीने तक पति के खिलाफ कानूनी जंग लड़ी और उसे 7 साल की सजा दिलाई। लेकिन अब जब उसने ससुराल में आशियाना मांगा, तो ससुराल वालों ने ताना मारते हुए कहा, “तूने पति को जेल भेज दिया, अब हमारी क्या बारी?” उन्होंने महिला को घर में रखने से इनकार कर दिया और कहा कि वह उन्हें भी सजा दिला सकती है। महिला ने बताया कि पति को उसके गलत कर्मों की सजा मिली है। अब वह अपने तीन बच्चों के साथ ससुराल में जगह पाने के लिए संघर्ष कर रही है। इसके लिए उसने जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता को शिकायत दी है।
ससुराल की प्रताड़ना
महिला ने बताया कि जब उसने पति के खिलाफ थाने में शिकायत की, तो ससुराल वालों ने उसे और तंग करना शुरू कर दिया। उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालत यह हो गई कि वह एक बार आत्महत्या करने रेलवे ट्रैक पर चली गई थी। एक युवक ने उसे बचाया और समझाया, जिसके बाद उसने हिम्मत जुटाकर कोर्ट में पति के खिलाफ गवाही दी। 20 अगस्त को अदालत ने पति को 7 साल की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना सुनाया। लेकिन शिकायत के बाद ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया। अब वह किराए के मकान में रह रही है।
लिव-इन पार्टनर को 30 साल की सजा
इसी क्षेत्र की एक अन्य महिला ने अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले लिव-इन पार्टनर को 30 साल की सजा दिलाई। महिला ने बताया कि 12 साल पहले उसने अपने पहले पति को छोड़कर लिव-इन में रहना शुरू किया था। अप्रैल 2023 में पार्टनर उसकी बेटी को दिल्ली ले गया और वहां दुष्कर्म किया। बाद में बेटी को बहन के घर छोड़कर वापस आ गया। चार महीने बाद उसने फिर अपराध किया। महिला ने हिम्मत दिखाकर पुलिस में शिकायत की, और 17 मई 2024 को उसे सजा सुनाई गई।
प्रशासन की कार्रवाई
महिला संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि महिला ने ससुराल में आशियाना दिलाने की शिकायत दी है। ससुराल पक्ष को कार्यालय बुलाया गया, लेकिन उन्होंने घर देने से इनकार कर दिया। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। महिला अपने बच्चों के साथ सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में संघर्ष कर रही है।











