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Tablighi Jamaat gathering in Nuh: नूंह में तब्लीगी जमात का ऐतिहासिक जलसा 15 लाख मुस्लिम होंगे शामिल, मौलाना साद करेंगे संबोधन

On: अप्रैल 18, 2025 9:21 पूर्वाह्न
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Tablighi Jamaat gathering in Nuh: नूंह में तब्लीगी जमात का ऐतिहासिक जलसा 15 लाख मुस्लिम होंगे शामिल, मौलाना साद करेंगे संबोधन
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Tablighi Jamaat gathering in Nuh: हरियाणा के नूंह में एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। 19 से 21 अप्रैल तक होने वाले तब्लीगी जमात के जलसे में देश-विदेश से करीब 15 लाख मुस्लिम हिस्सा लेंगे। यह नूंह में अपनी तरह का पहला जलसा है, जिसे जमात के प्रमुख मौलाना साद संबोधित करेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि नूंह के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी उजागर करता है। आइए, इस जलसे और इसके पीछे की कहानी को विस्तार से जानते हैं।

नूंह में पहली बार तब्लीगी जलसा Tablighi Jamaat gathering in Nuh

नूंह, जो कभी तब्लीगी जमात की शुरुआत का गवाह बना था, अब एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। 19 से 21 अप्रैल तक चलने वाले इस जलसे में करीब 15 लाख लोग शामिल होंगे। आयोजन के लिए 121 एकड़ जमीन पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसमें 21 एकड़ में टेंट लगाए गए हैं, जबकि बाकी 100 एकड़ में बैठने की व्यवस्था, पार्किंग, टॉयलेट, और पानी की सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। कयामगाह, बैतुल खला, वुजु खाना, और अस्थायी मस्जिद जैसे इंतजाम भी किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

मौलाना साद का संबोधन और इस्लामी संदेश

इस जलसे की सबसे खास बात है जमात के प्रमुख मौलाना साद का संबोधन। हजरत निजामुद्दीन से नूंह पहुंचने वाले मौलाना साद के साथ अन्य प्रमुख मौलाना भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य तब्लीगी जमात के अनुयायियों को इस्लामिक शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों पर चलने के लिए प्रेरित करना है। मीडिया कोऑर्डिनेटर रफीक मास्टर ने बताया कि यह जलसा लोगों को इस्लामी रास्तों पर चलने और समाज में भाईचारा बढ़ाने का संदेश देगा।

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नूंह: तब्लीगी जमात का उद्गम स्थल

नूंह का तब्लीगी जमात के इतिहास में विशेष महत्व है। 1926-27 में हजरत मौलाना इलियास कांधलवी ने यहीं से तब्लीगी जमात की नींव रखी थी। उन्होंने नूंह को इस्लामी शिक्षा और प्रचार का केंद्र बनाया। मदरसा मोइनुल इस्लाम, जो नूंह में स्थित है, तब्लीगी जमात के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। इस मदरसे से शुरू हुआ आंदोलन आज दुनिया के 150 से अधिक देशों में फैल चुका है। नूंह में होने वाला यह जलसा उस ऐतिहासिक विरासत को और मजबूत करेगा।

सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम

जलसे की व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए आयोजकों ने विशेष ध्यान दिया है। खास बात यह है कि कार्यक्रम स्थल के भीतर पुलिस की कोई एंट्री नहीं होगी। सुरक्षा बल बाहर से ही व्यवस्था और निगरानी का जिम्मा संभालेंगे। यह इंतजाम आयोजन की शांति और गरिमा को बनाए रखने के लिए किया गया है। आयोजकों ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पार्किंग, यातायात, और अन्य सुविधाओं को सुनिश्चित किया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

सामाजिक और धार्मिक महत्व

यह जलसा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। लाखों लोग एक साथ इस्लामी शिक्षाओं को सुनने और अपनाने के लिए जुटेंगे। यह आयोजन नूंह को वैश्विक स्तर पर इस्लामी शिक्षा और तब्लीगी जमात के केंद्र के रूप में और मजबूत करेगा। साथ ही, यह स्थानीय समुदाय के लिए भी गर्व का क्षण है, क्योंकि नूंह एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बना रहा है।

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जागरूकता और सहभागिता

नूंह का यह जलसा हरियाणा के लोगों के लिए भी एक अवसर है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें और इसके संदेश को समझें। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे शांति और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में शामिल हों। यह जलसा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, जो नूंह की पहचान को और निखारेगा।

 

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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