कुरुक्षेत्र हर वर्ष की तरह इस बार भी अध्यात्म और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर उठा। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत सोमवार को केशव पार्क में जिले के विभिन्न स्कूलों से पहुंचे इक्कीस हजार बच्चों ने एक साथ गीता का पाठ किया।
इस सामूहिक आयोजन की प्रतिध्वनि न केवल भारत में, बल्कि पचास से अधिक देशों तक पहुंची, जहां अलग अलग मंचों पर गीता जयंती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। धर्मनगरी का वातावरण गीता के श्लोकों से सराबोर हो गया और पूरा शहर एक आध्यात्मिक उत्सव जैसा नजर आया।
वैश्विक गीता पाठ में भाग लेने वाले छात्रों के लिए अवकाश
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। उन्होंने बच्चों के उत्साह और भागीदारी की सराहना करते हुए घोषणा की कि मंगलवार को सभी प्रतिभागी छात्रों के लिए विशेष अवकाश रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दिन से पांच हजार वर्ष से अधिक समय पहले भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान आज भी जीवन के हर पहलू को समझने में हमारी मदद करता है। उन्होंने बताया कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि मानवीय मनोविज्ञान और जीवन प्रबंधन का मार्गदर्शक भी है।
गीता के संदेश के वैज्ञानिक और सामाजिक आयाम
मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि गीता का अध्ययन व्यक्ति को क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार से दूर ले जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गीता के सिद्धांत मानसिक संतुलन, निर्णय क्षमता और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने में मदद करते हैं।
आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह शिक्षाएं आज की युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गीता को सम्मान दिलाने की पहल ने इस आयोजन को वैश्विक पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2016 के बाद से गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है और हर साल इसकी पहुंच बढ़ती जा रही है।
आध्यात्मिक गुरुओं ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में मौजूद योग गुरु रामदेव और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद समेत कई संतों ने छात्रों और उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
स्वामी ज्ञानानंद ने बताया कि हरियाणा के एक सौ चौदह खंडों में एक लाख से अधिक विद्यार्थी एक साथ गीता पाठ कर रहे हैं और दुनिया भर में लाखों लोग इसे देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गीता के उपदेश जीवन के हर संघर्ष में दिशा दिखाते हैं और यदि युवा इन मूल्यों को अपनाएं तो उनका आत्मविश्वास और चरित्र दोनों मजबूत होते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे गणमान्य
इस अवसर पर कई संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, धर्मगुरु और अधिकारी मौजूद रहे। सभी का मानना था कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।












