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Yamunanagar में Ahoi Ashtami 2025 का चांद और तारे देखने का समय, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

On: October 9, 2025 1:35 PM
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Yamunanagar में Ahoi Ashtami 2025 का चांद और तारे देखने का समय, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व
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Yamunanagar mein Ahoi Ashtami 2025 ka chand kab nikalega: अहोई अष्टमी का पर्व माताओं के लिए बेहद खास होता है। यह दिन मां और संतान के अटूट प्रेम का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार अहोई अष्टमी 2025 को लेकर थोड़ा असमंजस है, क्योंकि पंचांग के अनुसार तिथि दो दिनों तक रहेगी। तो आइए, हम आपको बताते हैं अहोई अष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व।

अहोई अष्टमी 2025 कब है यह व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिसके कारण सही तिथि को लेकर भ्रम है। पंचांग के अनुसार:

अष्टमी तिथि शुरू: 13 अक्टूबर 2025, रात 12:24 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर 2025, सुबह 11:09 बजे

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अहोई अष्टमी 2025 की तिथि: 13 अक्टूबर 2025, सोमवार

इसलिए, इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस व्रत को और खास बनाते हैं।

Yamunanagar में Ahoi Ashtami 2025 का चांद देखने का समय

अहोई अष्टमी की पूजा का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

पूजा समय: शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक

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तारों को देखने का समय: शाम 6:17 बजे तक

चंद्रोदय समय: रात 11:20 बजे

माताएं इस शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा करती हैं और तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारायण करती हैं।

इस साल बन रहे हैं खास योग

इस बार अहोई अष्टमी पर कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जो इसे और भी विशेष बना रहे हैं। शिव योग, सिद्ध योग, परिघ योग और रवि योग का संयोग इस दिन पड़ रहा है। ये योग कई सालों बाद एक साथ आ रहे हैं, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ गया है। माना जाता है कि इन योगों में की गई पूजा और व्रत से माताओं की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।

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अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत मातृत्व के प्रेम और संतान की मंगल कामना का प्रतीक है। इस दिन माताएं पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए निर्जला व्रत रखती हैं। यह तपस्या संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए की जाती है। शाम को माता अहोई, जो मां पार्वती का ही एक स्वरूप हैं, की विधिवत पूजा की जाती है। पूजा के बाद रात में तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ स्थानों पर सप्तमी की रात को ही अहोई माता की कथा सुनने की परंपरा है, जो अष्टमी तक चलती है।

इस व्रत की खास बात यह है कि यह माताओं के अटूट विश्वास और उनके बच्चों के प्रति प्रेम को दर्शाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मां और संतान के रिश्ते को और मजबूत करता है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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