Haryana News: यमुना में पॉल्यूशन के लिए पानीपत व गुरुग्राम सबसे आगे

Haryana: पानीपत की हैवी इंडस्ट्री परेशानी का सबब बनी है। कुल अमोनिया नाइट्रेट अकेले 45 फीसद पानीपत की इंडस्ट्री से यमुना में विसर्जित हो रहा है। गुरुग्राम और सोनीपत में इंडस्ट्रियल यूनिट्स यमुना में अपशिष्ट पदार्थ छोड़ रहे हैं।
चंडीगढ़। Haryana News: यमुना नदी में बढ़ता प्रदूषण हर किसी के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) यमुना को साफ रखने को लेकर समय समय पर दिशा निर्देश जारी करता रहे हैं
और संबंधित राज्यों को इस पॉल्यूशन के लिए जिम्मेदार इंडस्ट्रियल यूनिट्स के प्रति सख्ती बरतने के लिए भी कहा जाता है। एनजीटी के सख्त रवैये के बाद भी नियमों का मजाक बनाने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
गत दिनों मामले की गंभीरता को देखते हुए सीपीसीबी ने यमुना में इंडस्ट्रियल यूनिट्स द्वारा बहाए जा रहे केमिकल डिस्चार्ज पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इस दिशा में संबंधित राज्यों को जरूरी कदम उठाने को कहा है। अगर हरियाणा की बात करें
तो यमुना में प्रदूषण फैलाने के मामले में प्रदेश का पानीपत जिला सबसे आगे हैं। जिस तरह के औधोगिक विकास के चलते जल व वायु प्रदूषण बढ़ रहा है वो भी अपने आप में चिंता का विषय है। समय का तकाजा है कि नियमों को ताक पर रखने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स पर जितनी जल्दी हो सके, लगाम लगाई जाए।
पानीपत व गुरुग्राम यमुना को प्रदूषित करने में अव्वल, अमोनिया नाइट्रोजन विसर्जन में सबसे आगे
प्रदेश के कई जिलों से यमुना गुजरती है। हैवी इंडस्ट्री वाले जिले सीधे तौर पर यमुना में पॉल्यूशन के लिए जिम्मेदार हैं। यमुना में अमोनिया नाइट्रोजन विसर्जित करने के मामले में पानीपत जिला सबसे आगे है।
रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में यमुना में जितना अमोनिया नाइट्रोजन में रिलीज किया जा रहा है, उसका 45 फीसद से ज्यादा तो अकेले पानीपत से ही है। इसके बाद गुरुग्राम है जहां ये मात्रा 25 फीसद से ज्यादा है।
तो वहीं इसके बाद फरीदाबाद में 15.17 फीसद, सोनीपत में 10.11 फीसद और भिवानी में 2.3 फीसद अमोनिया नाइट्रेट रिलीज किया गया । ये भी सामने आया है कि यमुना में जितना अमोनिया नाइट्रेट विसर्जित किया जा रहा है,
उसमें से 64 फीसद तो टेक्सटाइल इंड्स्ट्री से है तो बाकी अन्य इंडस्ट्री से डाला जा रहा है। औधोगिक विकास की होड़ में यमुना में बढ़ते प्रदूषण और सतही जल भंडार का खराब होता पानी चिंता का विषय है।
यमुना में सबसे ज्यादा पॉल्यूशन कर रही 15 इंडस्ट्री में से 6 अकेले पानीपत में
आधिकारिक जानकारी में ये भी सामने आय़ा है कि संबंधित अथॉरिटी द्वारा जो सैंपल भरे गए, उसके अनुसार सबसे ज्यादा केमिकल या अपशिष्ट पदार्थ जेनरेट करने वाली 15 जीपीआई में से 6 अकेले पानीपत में हैं।
पानीपत की ये सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स टैक्सटाइल सेक्टर की हैं। वहीं कुल 15 में 13 इंडस्ट्री टैक्सटाइल सेक्टर की हैं। वहीं भिवानी में एक यूनिट है। सोनीपत में भी एक ही यूनिट है।
इसके अलावा बल्लभगढ़ में 2 , फरीदाबाद में 1, और गुरुग्राम साउथ में दो यूनिट हैं। इसके अलावा गुरुग्राम में 2 और यूनिट हैं। इस लिहाज से देखें तो साफ है कि नियमों की अवहेलना करने वाली पानीपत, गुरुग्राम और सोनीपत जिलों की इंडस्ट्रियल यूनिट्स पर पैनी नजर बनाए रखने की जरूरत है।
एचएसपीसीबी को अवहेलना करने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स पर लगाम लगाने के आदेश दिए
सीपीसीबी ने निर्देश जारी करते हुए साफ कहा है कि हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जो जीपीआई यूनिट अमोनियाकल नाइट्रोजन और नाइट्रेट की निर्धारित से कहीं ज्यादा मात्रा जेनरेट कर रहे हैं, उनको सचेत कर दिया जाए और इस बारे में उनको निर्देश जारी कर दिए जाएं।
इस बारे में निर्धारित अवधि में एक्शन प्लान सबमिट करने के लिए कहा गया था। साथ ही ये भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि क्लीनर टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए अमोनियाकल नाइट्रेट और फास्फेट की मात्रा कम से कम की जाए. साथ ही ईटीपी सिस्टम की अपग्रेडशन भी होनी चाहिए।
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हैवी केमिकल रिलीज करने वाली ग्रोसली पॉल्यूटिंग इंडस्ट्री बनी परेशानी का सबब
ग्रोसली पॉल्यूटिंग इंड्स्ट्री (जीपीआई) यमुना में प्रदूषण के लिए व्यापक पैमाने पर जिम्मेदार है। इस कैटेगरी में वो इंड्स्ट्री आती है जो हर रोज 100 किलो से ज्यादा अपशिष्ट पदार्थ विसर्जित करती है। फामार्स्यूटिकल, ओर्गेनिक, खाद, ऱिफाइनरी और पेस्टीसाइड वाली इंडस्ट्री केमिकल विसर्जित करती है।
इसके अलावा डिस्टलरी, पल्प, पेपर, टैक्सटाइल, डाईंग, ब्लिचिंग, स्लॉटर हाउस, टैनरी और फूड व डेयरी इंडस्ट्री भी इसी कैटेगरी में आती हैं। इन इंडस्ट्रीज द्वारा रिलीज किए जा रहे अपशिष्ट पदार्थ यमुना में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।
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कई राज्य पॉल्यूशन के लिए जिम्मेदार
सीपीसीबी द्वारा हरियाणा स्टेट पॉल्य़ूशन कंट्रोल बोर्ड (एचएसपीसीबी) के मेंबर सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र के अनुसार कई राज्यों द्वारा निरंतर अपशिष्ट पदार्थ यमुना में विसर्जित किए जा रहे हैं। इन राज्यों में उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैवी इंडस्ट्री द्वारा निरंतर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
दिल्ली में यमुना में बढ़ता प्रदूषण निरंतर चर्चा में रहा है और मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां भी बटोरता रहा है। केंद्र व दिल्ली सरकार भी मामले पर आमने सामने रहे हैं।
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413 जीपीआई इंडस्ट्री से निर्धारित से कहीं ज्यादा केमिकल जेनरेट कर रही
प्राप्त जानकारी में ये भी सामने आया है अलग अलग जिलों में 413 जीपीआई इफ्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के सैंपल भरे गए थे। इनमें से पाया गया कि हर रोज 277 किलो अमोनियाकल नाइट्रेट और 189 नाइट्रेट लोड वॉटर बॉडीज में ड्रेन के द्वारा रिलीज किया रहा है।
ऐसे में साफ पता चलता है कि किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व अन्य संबंधित तकनीकी संस्थानों द्वारा इंस्पेक्शन किए गए थे।
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