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Bandi Chhor Divas: गुरु हरगोबिंद साहिब ने 52 राजाओं को छुड़ाया, जानें इतिहास

On: अक्टूबर 21, 2025 6:17 पूर्वाह्न
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Bandi Chhor Divas: गुरु हरगोबिंद साहिब ने 52 राजाओं को छुड़ाया, जानें इतिहास
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Bandi Chhor Divas Today 21 October Guru Hargobind Sahib: नई दिल्ली | सिख समुदाय का खास त्योहार ‘बंदी छोड़ दिवस’ दीपावली के आसपास बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार सिखों के छठवें गुरु, हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर जेल से रिहाई और उनके साथ 52 हिंदू राजाओं की आजादी की याद में मनाया जाता है।

इस दिन गुरुद्वारों में दीप जलाए जाते हैं, आतिशबाजी होती है और नगर कीर्तन निकाला जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस त्योहार के पीछे की कहानी कितनी प्रेरणादायक है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

गुरु हरगोबिंद साहिब की रिहाई की कहानी Bandi Chhor Divas

सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखकर मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोबिंद साहिब जी को धोखे से ग्वालियर के किले में कैद कर लिया था, जहां पहले से ही 52 हिंदू राजा बंदी थे। लेकिन कहते हैं कि गुरु जी को कैद करने के बाद जहांगीर गंभीर रूप से बीमार पड़ गया।

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उसके काजी ने सलाह दी कि गुरु जी को रिहा करने से उसकी तबीयत ठीक हो सकती है। जहांगीर ने तुरंत गुरु जी को छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन गुरु हरगोबिंद साहिब ने अकेले रिहा होने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे तभी जेल से बाहर जाएंगे, जब उनके साथ कैद 52 राजा भी आजाद होंगे।

जहांगीर की शर्त और गुरु जी की चतुराई Bandi Chhor Divas

जहांगीर ने चालाकी दिखाते हुए शर्त रखी कि केवल वही राजा रिहा होंगे, जो गुरु जी के कपड़े या शरीर को पकड़कर बाहर निकल सकें।

उसकी सोच थी कि ज्यादा राजा ऐसा नहीं कर पाएंगे। लेकिन गुरु जी ने एक खास जामा (कुरता) सिलवाया, जिसमें 52 कलियां थीं। हर राजा ने एक-एक कली पकड़ी और इस तरह सभी 52 राजा गुरु जी के साथ आजाद हो गए। इस घटना के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब को ‘बंदी छोड़ दाता’ कहा जाने लगा।

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अमृतसर में हुआ भव्य स्वागत

जब गुरु जी अमृतसर लौटे, तो हरमंदिर साहिब में दीप जलाकर उनका जोरदार स्वागत किया गया। बाद में इस दिन को ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला हुआ।

इस दिन सिख समुदाय नगर कीर्तन, अखंड पाठ और कीर्तन के साथ उत्सव मनाता है। हरमंदिर साहिब और आसपास का इलाका हजारों झिलमिलाती रोशनियों से सजाया जाता है। आतिशबाजी का शानदार प्रदर्शन भी होता है। सिख परिवार इस मौके पर गुरुद्वारों में जाते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।

बंदी छोड़ दिवस का महत्व

यह त्योहार सिख समुदाय के लिए बहुत खास है। यह न केवल गुरु हरगोबिंद साहिब जी की बहादुरी और दयालुता की याद दिलाता है, बल्कि दूसरों की मदद करने का संदेश भी देता है। 20वीं सदी में कुछ नेताओं ने इसे दीपावली के साथ जोड़ दिया, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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