रेवाड़ी, 07 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। रेवाड़ी स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. नंदिनी जैन ने प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। डॉ. जैन का मानना है कि प्रजनन क्षमता केवल क्लिनिक में होने वाले इलाज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि शरीर का मेटाबॉलिज्म, तनाव का स्तर और रक्त संचार इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। डॉ. नंदिनी जैन ने बताया कि व्यायाम कोई इलाज का विकल्प नहीं है, लेकिन यह शरीर को ऐसी स्थिति में ले आता है जहाँ गर्भधारण की संभावना और उपचार का असर बेहतर हो सके।
तेज चाल और योग से सुधरेगा हार्मोनल बैलेंस
डॉ. नंदिनी जैन के अनुसार, प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तेज गति से चलना (Brisk Walking) शरीर में इंसुलिन संतुलन को बेहतर बनाता है। यह खासकर उन महिलाओं के लिए रामबाण है जो पीसीओएस (PCOS) जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। वहीं, हफ्ते में 2-3 बार सौम्य योग का अभ्यास मानसिक शांति देता है और कॉर्टिसोल जैसे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को नियंत्रित करता है, जो सीधे तौर पर प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
पेल्विक हेल्थ और मांसपेशियों की मजबूती पर जोर
पिलाटीज और हल्की रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को भी डॉ. जैन ने फर्टिलिटी के लिए उपयोगी बताया है। पिलाटीज पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे प्रजनन अंगों में रक्त का संचार सुधरता है। इसके अलावा, हफ्ते में दो से तीन बार हल्के वजन के साथ स्क्वैट्स और लंजेस जैसे व्यायाम शरीर को ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करने में मदद करते हैं, जिससे हार्मोनल तालमेल बना रहता है।
तैराकी और विशेषज्ञ की सावधानियां
हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए तैराकी एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि इसमें जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। डॉ. जैन ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि बहुत अधिक थकाने वाले व्यायाम और कम भोजन का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। एग रिट्रीवल जैसी जटिल प्रक्रियाओं के बाद भारी वजन उठाने या कठिन वर्कआउट से पूरी तरह बचना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फर्टिलिटी के लिए कोई एक तय व्यायाम नहीं होता। डॉ. नंदिनी जैन के मुताबिक, एक ऐसी दिनचर्या बनाना जरूरी है जिसमें शरीर सक्रिय रहे लेकिन उस पर अनावश्यक दबाव न पड़े। संतुलित जीवनशैली ही प्रजनन स्वास्थ्य का असली आधार है।
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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह न समझें। किसी भी फिटनेस प्रोग्राम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें। डाइट में बदलाव करने से पहले भी अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।












