Hindi Par Shayari, Shayari on Hindi (हिंदी भाषा पर शायरी 2025): हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और संस्कृति का आईना है। यह हमारे देश के 150 करोड़ लोगों के दिलों को जोड़ने वाली वो जादुई डोर है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। 1949 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला और तब से यह प्रशासन, शिक्षा, साहित्य और मीडिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है। हिंदी दिवस 2025 के मौके पर आइए, हिंदी की मिठास को शायरियों के जरिए महसूस करें और इस खूबसूरत भाषा पर गर्व करें!
Hindi Par Shayari: हिंदी पर शायरी
हिंदी भाषा ने सदियों से साहित्य की दुनिया को रंगों से भर दिया है। अमीर खुसरो से लेकर कुमार विश्वास तक, हर कवि और शायर ने हिंदी में अपनी कलम से जादू बिखेरा है। इस भाषा की मिठास ऐसी है कि यह हर दिल को छू लेती है। चाहे कविताएं हों, कहानियां हों, दोहे हों या शायरियां, हिंदी ने हर रूप में हमें गौरवान्वित किया है। ये शायरियां न सिर्फ हिंदी की खूबसूरती को दर्शाती हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और भावनाओं को भी बयां करती हैं।
जब से बच्चों को पसंद आई हैं हिन्दी फिल्में
मुझ को अब्बा नहीं कहते वो पिता कहते हैं
– खालिद इरफ़ान
भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से न्यारा है
मज़हब कुछ हो हिन्दी हैं हम सारे भाई भाई हैं
– हामिदुल्लाह अफ़सर
इस ने ज़बान-ए-‘मीर’ को हिन्दी का रस दिया
उर्दू ग़ज़ल को इस ने नया कैनवस दिया
– दिलावर फ़िगार
निफ़ाक़ ओ ग़फ़लत की आड़ ले कर जियेगा मुर्दा निज़ाम कब तक
रहेंगे हिन्दी असीर कब तक रहेगा भारत ग़ुलाम कब तक
– कैफ़ी आज़मी
हिंदी पर लिखी गई शायरियां हमारी भाषा की ताकत और उसकी मधुरता को दिखाती हैं। इन शब्दों में बस्ता है वो जज्बा, जो हिंदुस्तान की हर गली-नुक्कड़ में सुनाई देता है। चाहे प्यार की बात हो, देशभक्ति का जज्बा हो या जिंदगी की सीख, हिंदी की शायरी हर भाव को बखूबी बयां करती है। आइए, कुछ मशहूर शायरों की हिंदी शायरियों को पढ़कर इस भाषा की मिठास को और करीब से महसूस करें।
Hindi Bhasha Par Shayari
दिया ‘इक़बाल’ ने हिन्दी मुसलमानों को सोज़ अपना
ये इक मर्द-ए-तन-आसाँ था तन-आसानों के काम आया
– अल्लामा इक़बाल
हिन्दी बोलूं आरसी आए
‘ख़ुसरव’ कहे कोई न बताए
– अमीर ख़ुसरो
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना
– अज्ञात
कोई देखे तो मेरी नय-नवाज़ी
नफ़्स हिन्दी मक़ाम-ए-नग़्मा ताज़ी!
– अल्लामा इक़बाल
मौज-ए-हवा को चूमता आया
मेरी ज़बां थी उर्दू, हिन्दी
– अली सरदार जाफ़री
Shayari on Hindi Language
कोई किताब अपने ठिकाने न रह सकी
हिन्दी को फ़ारसी में मिलाते चले गए
– राजा मेहदी अली ख़ाँ
फ़र्क़ समझते हैं अब तक हिन्दी सिंधी पंजाबी में
इन अक़्ल के पूरे लोगों से लड़ने की हिमाक़त कौन करे
– अबुल फ़ितरत मीर ज़ैदी
तेग़ की हिन्दी अगर तलवार है
फ़ारसी पगड़ी की भी दस्तार है
– मिर्ज़ा ग़ालिब
सगी बहनों का जो रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता
– मुनव्वर राना
उर्दू हिन्दी प्यारी बहनें
प्यार का गहना दोनों पहनें
– जौहर रहमानी
Famous Shayari on Hindi Language
इक ‘मीर’ था सो आज भी काग़ज़ में क़ैद है
हिन्दी ग़ज़ल का दूसरा अवतार मैं ही हूँ
– बशीर बद्र
अल-क़िस्सा अजीब ज़ीक़ में हैं हिन्दी
यूरोप का ख़ुदा कहां पर जो हामी हो
– अकबर इलाहाबादी
Hindi Pe Shayari
लिपट जाता हूं मां से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं हिन्दी मुस्कुराती है
दुनिया का सबसे बड़ा साँप! जानिये इसके नाम और साइज के बारे में
और जानें
– मुनव्वर राना
साफ़-सुथरी ज़बान हिन्दी है
ख़ुश-बयानी की जान हिन्दी है
– चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
Hindi Shayari on Hindi Diwas
मिस्ल-ए-अंजुम उफ़ुक़-ए-क़ौम पे रौशन भी हुए
बुत-ए-हिन्दी की मोहब्बत में बिरहमन भी हुए
– अल्लामा इक़बाल
इंग्लिश अगर न आ सकी हिन्दी तो सीख ली
उस शोख़ की निगाह में जाहिल नहीं रहा
– हाशिम अज़ीमाबादी
मेरी उर्दू के सब बोल तिरे
तिरी हिन्दी भाषा मोरी सजन
– इंजील सहीफ़ा













