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Indira Ekadashi: भगवान विष्णु की कृपा पाने का मौका, पढ़ें चालीसा और कथा!

On: सितम्बर 16, 2025 9:56 पूर्वाह्न
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Indira Ekadashi: भगवान विष्णु की कृपा पाने का सुनहरा मौका, पढ़ें चालीसा और कथा!
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Indira Ekadashi: Golden opportunity to get the blessings of Lord Vishnu, read Chalisa and story!: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है, और खासकर पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी बेहद खास मानी जाती है।

इस साल 17 सितंबर 2025 को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। यह दिन न केवल भगवान विष्णु की पूजा के लिए बल्कि पितरों की कृपा पाने के लिए भी उत्तम है। इस खास मौके पर विष्णु चालीसा का पाठ करने से भक्तों को प्रभु श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी की कथा और विष्णु चालीसा का पाठ, जो आपके जीवन में सुख-शांति ला सकता है।

इंदिरा एकादशी की कथा Indira Ekadashi

पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु और पितरों की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, फिर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखते हैं। इस व्रत के साथ विष्णु चालीसा का पाठ करने से मन को शांति और जीवन में सकारात्मकता आती है। यह एकादशी भक्तों को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है।

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विष्णु चालीसा का पाठ

इंदिरा एकादशी के दिन विष्णु चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह चालीसा भगवान विष्णु की महिमा का बखान करती है और भक्तों के लिए प्रभु की कृपा पाने का एक आसान रास्ता है। नीचे दी गई चालीसा को आप इस पवित्र दिन पर पढ़ सकते हैं:

||दोहा||
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय॥

||चौपाई||

नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन॥

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पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥
चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥

|| इति श्री विष्णु चालीसा ||

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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