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Navratri 5th Day: माता स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख, जानें मंत्र और कथा!

On: सितम्बर 27, 2025 8:11 पूर्वाह्न
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Navratri 5th Day: माता स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख, जानें मंत्र और कथा!
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Navratri 5th Day Skandamata puja: नवरात्रि इस साल 10 दिनों की है, और आज 27 सितंबर 2025 को नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता स्कंदमाता की विधिवत पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिल सकता है। आइए जानते हैं माता स्कंदमाता का स्वरूप, उनकी पूजा विधि, भोग, मंत्र, कथा और आरती के बारे में, ताकि आप भी माता की कृपा पा सकें।

माता स्कंदमाता का स्वरूप Navratri 5th Day

माता स्कंदमाता की गोद में उनके पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) विराजमान हैं। माता कमल के आसन पर बैठी हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहते हैं। उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि माता के इस पांचवें स्वरूप की पूजा करने से संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

स्कंदमाता की पूजा विधि

माता स्कंदमाता की पूजा करना बेहद आसान है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। घर के पूजा स्थल या मंदिर में चौकी पर माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

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माता को गंगाजल से स्नान कराएं और षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें कमल का फूल, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं। ‘ॐ देवी स्कंदमातायै नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। पूजा के बाद माता की आरती करें और दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ करें।

माता को क्या भोग लगाएं?

माता स्कंदमाता को केले का भोग बहुत प्रिय है। इसके अलावा केसरयुक्त खीर भी चढ़ाई जा सकती है। माता को पीले रंग की चीजें पसंद हैं, इसलिए पूजा में पीले फल, वस्त्र या अन्य सामग्री का इस्तेमाल करें।

स्कंदमाता के मंत्र

मूल मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।

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स्तुति मंत्र: सिंहासना-गता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
प्रार्थना मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माता स्कंदमाता की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस तारकासुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। उसने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने कहा कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है। तब तारकासुर ने कहा कि उसकी मृत्यु केवल शिवजी के पुत्र के हाथों हो। उसे लगा कि शिवजी का विवाह नहीं होगा, तो उसकी मृत्यु भी नहीं होगी।

ब्रह्माजी ने तथास्तु कहकर वरदान दे दिया। इसके बाद तारकासुर ने अपने अत्याचारों से पृथ्वी और स्वर्ग को त्रस्त कर दिया। सभी देवता परेशान होकर शिवजी के पास गए और तारकासुर से मुक्ति की प्रार्थना की। तब शिवजी ने माता पार्वती से विवाह किया और कार्तिकेय के पिता बने। बाद में कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया। माता स्कंदमाता कार्तिकेय की माता हैं।

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माता स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मैं॥
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥
कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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