Navratri Fourth Day Maa Kushmanda puja:: नई दिल्ली | शारदीय नवरात्रि 2025 का रंग सितंबर में जमकर चढ़ रहा है। आज, 25 सितंबर 2025, गुरुवार को नवरात्रि का चौथा दिन है, और इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां का यह रूप मनोकामनाएं पूरी करने और हर बाधा को दूर करने वाला माना जाता है।
द्रिक पंचांग के मुताबिक, आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:37 तक रहेगा, जबकि राहुकाल दोपहर 1:43 से 3:13 बजे तक रहेगा।
मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा Navratri Fourth Day
कहा जाता है कि जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, चारों ओर सिर्फ अंधेरा था। तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान और शक्ति से सूर्य का तेज पैदा किया और ब्रह्मांड को रोशनी से भर दिया।
यही वजह है कि मां को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। उनकी आठ भुजाएं हैं, जिनमें अमृत कलश, जपमाला और विभिन्न हथियार शोभायमान हैं। सिंह पर सवार मां कूष्मांडा भक्तों को बल, बुद्धि, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
दुर्गा पुराण के अनुसार, मां कूष्मांडा ने ही ब्रह्मांड (‘अंड’) की रचना की। खासकर विद्यार्थियों को उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए, क्योंकि इससे बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। मां की साधना से सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति और ऊर्जा मिलती है।
मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।
मां कूष्मांडा का पूजा मंत्र
ऊं कुष्माण्डायै नम:
मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिङ्गला ज्वालामुखी निराली। शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे। सुख पहुंचाती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
मां कूष्मांडा की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। माता की चौकी को साफ करें और उन्हें पान, सुपारी, फूल, फल, लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, गुड़हल के फूल, चंदन और रोली अर्पित करें। मां को मालपुआ का भोग लगाएं, जो उनकी प्रिय मिठाई है। घी का दीपक और धूप जलाएं। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में मां की आरती करें।












