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Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी व्रत के 4 सरल उपाय, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी!

On: June 3, 2025 4:49 PM
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Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी व्रत के 4 सरल उपाय, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी!
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Nirjala Ekadashi 2025 4 Simple Tips For This Holy Vrat That Will Change Your Life: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है, और निर्जला एकादशी को इनमें सबसे कठिन और प्रभावशाली माना जाता है। यह पावन दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, और इस व्रत में भक्त बिना जल और अन्न ग्रहण किए अपनी भक्ति और संयम का परिचय देते हैं।

मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत साल की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करता है। यह न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन की हर मुश्किल को दूर करने का भी मार्ग प्रशस्त करता है। साल 2025 में यह पर्व 6 जून, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

निर्जला एकादशी व्रत का महत्‍व

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है, और निर्जला एकादशी को इनमें सबसे कठिन और प्रभावशाली माना जाता है। यह पावन दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, और इस व्रत में भक्त बिना जल और अन्न ग्रहण किए अपनी भक्ति और संयम का परिचय देते हैं। मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत साल की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करता है।

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यह न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन की हर मुश्किल को दूर करने का भी मार्ग प्रशस्त करता है। साल 2025 में यह पर्व 6 जून, शुक्रवार को मनाया जाएगा। आइए, इस खास अवसर पर कुछ सरल उपायों के बारे में जानें, जो आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति ला सकते हैं।

निर्जला एकादशी का यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह तिथि 6 जून 2025 को रात 2:15 बजे शुरू होगी और 7 जून को सुबह 4:47 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण 7 जून को दोपहर 1:44 बजे से 4:31 बजे के बीच किया जाएगा। इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। यह व्रत न केवल आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह हमें दूसरों की मदद और दान-पुण्य के महत्व को भी सिखाता है।

Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी व्रत के 4 सरल उपाय

इस पावन दिन पर भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने तुलसी की मंजरी चढ़ाएं। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, बल्कि पहले से रखे गए पत्तों का उपयोग करें। यह उपाय आर्थिक तंगी को दूर करने और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक है।

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निर्जला एकादशी पर श्रीफल (नारियल) का दान भी विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को नारियल अर्पित करें और फिर इसे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान दे दें। मान्यता है कि यह उपाय जीवन की बाधाओं को दूर करता है और मां लक्ष्मी की कृपा से धन-वैभव की प्राप्ति होती है। यह छोटा-सा कार्य आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी है। स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु के सामने बैठें और सहस्रनाम का पाठ करें। यह उपाय न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी प्रदान करता है। खास तौर पर उन लोगों के लिए यह उपाय उपयोगी है, जो जीवन में बार-बार असफलता का सामना कर रहे हैं। इस पाठ से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

निर्जला एकादशी का एक और महत्वपूर्ण उपाय है दान-पुण्य। इस दिन अन्न, जल और वस्त्र का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराएं, पानी का दान करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। यह कार्य न केवल भगवान विष्णु का आशीर्वाद दिलाता है, बल्कि जीवन से नकारात्मकता को भी दूर करता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में सेवा और परोपकार का विशेष स्थान है।

निर्जला एकादशी का यह पर्व हमें आत्मसंयम, भक्ति और दूसरों की मदद करने का अवसर देता है। इस दिन इन सरल उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं। आइए, इस निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन को और भी बेहतर बनाएं।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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