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पितृ कृपा के लिए पौष अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें

On: December 18, 2025 7:38 PM
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पितृ कृपा के लिए पौष अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें
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पौष अमावस्या हिंदू पंचांग की उन तिथियों में गिनी जाती है, जिनका संबंध सीधे पितरों की स्मृति और सम्मान से जुड़ा है। हर महीने आने वाली अमावस्या पितृ कर्मों के लिए शुभ मानी जाती है, लेकिन पौष माह की अमावस्या को इसका विशेष विस्तार माना जाता है। कई आचार्य इसे वर्ष का दूसरा पितृ पक्ष भी कहते हैं, क्योंकि इस दौरान किए गए कर्मों का प्रभाव दीर्घकालिक माना गया है।

इस बार 19 दिसंबर को पौष अमावस्या मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

क्यों अहम है पौष अमावस्या

धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, पौष माह शीत ऋतु का प्रतिनिधित्व करता है। इस समय किया गया दान और पूजा संयम, त्याग और कृतज्ञता का प्रतीक होता है। यही कारण है कि इस अमावस्या पर किए गए पितृ कर्मों को सामान्य अमावस्या की तुलना में अधिक फलदायी बताया गया है।

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि पौष अमावस्या पर पितरों के लिए किया गया अर्पण
• पारिवारिक तनाव को कम करता है
• आर्थिक स्थिरता में सहायक होता है
• मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है

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स्नान, दान और तर्पण का धार्मिक महत्व

पौष अमावस्या की सुबह स्नान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि प्रातःकाल स्वच्छ जल में स्नान करने से न केवल शरीर बल्कि मन की शुद्धि भी होती है। ठंड के मौसम में किया गया यह स्नान आत्मसंयम और साधना का प्रतीक माना जाता है।

स्नान के बाद
• अन्न
• वस्त्र
• तिल और गुड़
• धन या दैनिक उपयोग की वस्तुएं

का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन का दान जीवन में संचित नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

तर्पण और श्राद्ध की सरल विधि

पौष अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल नहीं होती। श्रद्धा और शुद्ध भाव ही इसका मूल आधार है।

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तर्पण विधि
स्नान के बाद शांत स्थान पर बैठकर तांबे या मिट्टी के पात्र में जल, तिल और कुशा मिलाएं। पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें। मान्यता है कि इससे पूर्वज तृप्त होते हैं।

श्राद्ध कर्म
इस दिन योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और वस्त्र या अन्न का दान करना श्राद्ध का सरल रूप माना गया है। आधुनिक समय में गरीबों और वृद्धों की सहायता को भी श्राद्ध कर्म के समकक्ष माना जा रहा है।

पौष अमावस्या का शुभ समय

पंचांगों के अनुसार, पौष अमावस्या पर स्नान और दान के लिए प्रातः लगभग 5:19 से 6:14 बजे तक का समय विशेष शुभ माना गया है।
इस अवधि में किए गए कर्मों को
• बाधा निवारण
• पितृ कृपा
• पारिवारिक सुख

से जोड़ा जाता है।

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आगे क्या करें

जो लोग विस्तृत विधि नहीं कर सकते, वे इस दिन कम से कम
• पितरों का स्मरण
• किसी जरूरतमंद की सहायता
• सात्विक भोजन और संयम

अपनाकर भी धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। विद्वानों का मानना है कि भाव और नीयत ही सबसे बड़ा अनुष्ठान है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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