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5G Wi-Fi Plans: क्या जियो और एयरटेल की सस्ती रणनीति बन सकती है घाटे का सौदा?

On: June 5, 2025 11:53 AM
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5G Wi-Fi Plans: क्या जियो और एयरटेल की सस्ती रणनीति बन सकती है घाटे का सौदा?
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5G Wi-Fi Plans Can Jio and Airtel low-cost strategy turn out to be a losing proposition: भारत में 5G तकनीक ने इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला दी है। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसे टेलीकॉम दिग्गज सस्ते 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) प्लान्स के जरिए लाखों घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये किफायती प्लान्स, जो डेटा की भारी खपत को बढ़ावा दे रहे हैं, लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकते। क्या ये सस्ते प्लान्स टेलीकॉम कंपनियों के लिए आर्थिक चुनौती बन सकते हैं? आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं।

तेजी से बढ़ रहे FWA कनेक्शन, लेकिन चुनौतियां बरकरार

जियो और एयरटेल हर महीने लाखों नए FWA ग्राहक जोड़ रहे हैं। अप्रैल 2025 तक, भारत में कुल 75 लाख FWA यूजर्स हैं, जिनमें जियो के 61.4 लाख और एयरटेल के 13.6 लाख ग्राहक शामिल हैं। हर महीने औसतन 7.3 लाख नए FWA कनेक्शन जोड़े जा रहे हैं, जो फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के 3.7 लाख कनेक्शनों से कहीं ज्यादा है।

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यह तेजी निश्चित रूप से प्रभावशाली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल 5G स्पेक्ट्रम की भीड़ को बढ़ा सकता है। जैसे-जैसे मोबाइल 5G यूजर्स की संख्या बढ़ेगी, FWA कनेक्शन नेटवर्क पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे कंपनियों को या तो कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं या फाइबर-आधारित कनेक्शनों की ओर रुख करना पड़ सकता है।

सस्ते प्लान्स का गणित फायदा या नुकसान?

एवेंडस कैपिटल के विशेषज्ञ प्रवीण झावर के अनुसार, मोबाइल 5G प्लान्स में जहां कंपनियां 1GB डेटा के लिए ₹200 चार्ज करती हैं, वहीं FWA प्लान्स में तीन महीने के लिए 1000GB डेटा मात्र ₹2200 में मिल रहा है। यह प्रति GB लागत के हिसाब से टेलीकॉम कंपनियों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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डेटा की भारी खपत वाले घरों में FWA का यह मॉडल लागत और राजस्व के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अब सिर्फ ग्राहकों की संख्या बढ़ाने की बजाय वैल्यू-बेस्ड प्लान्स, जैसे कंटेंट स्ट्रीमिंग, क्लाउड सर्विसेज, और एंटरप्राइज सेवाओं पर ध्यान देना होगा।

फाइबर और हाइब्रिड मॉडल

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश चारिया का कहना है कि उपभोक्ता अब धीरे-धीरे FWA की बजाय फाइबर-आधारित कनेक्शनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर टियर 2 और टियर 3 शहरों में, जहां इंटरनेट की मांग तेजी से बढ़ रही है, एक हाइब्रिड मॉडल (FWA, डीप फाइबर, और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर का मिश्रण) ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। यह मॉडल न केवल नेटवर्क की भीड़ को कम करेगा, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और लाभकारी भी साबित होगा।

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आपके लिए क्या है बेहतर?

PwC इंडिया के विनिश बावा का सुझाव है कि टेलीकॉम कंपनियों को अब सिर्फ डेटा की मात्रा पर ध्यान देने की बजाय मूल्यवर्धित सेवाओं पर जोर देना चाहिए। उदाहरण के लिए, कंटेंट बंडलिंग, क्लाउड-आधारित समाधान, और बिजनेस-केंद्रित सेवाएं ग्राहकों को आकर्षित करने के साथ-साथ कंपनियों के लिए राजस्व का नया स्रोत बन सकती हैं। उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे अपनी जरूरतों के हिसाब से सही प्लान चुनें, ताकि उन्हें तेज और भरोसेमंद इंटरनेट का अनुभव मिले।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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