Aaj Ka Panchang 12 May 2025 buddha purnima disha shool time: 12 मई 2025 को वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन गाय को पालक और रोटी खिलाने, पक्षियों को दाना-पानी देने और गायत्री मंत्र का जप करने से असीम पुण्य मिलता है। आइए, आज के पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशा शूल और पूजा के खास उपायों को विस्तार से जानें।
बुद्ध पूर्णिमा आध्यात्मिकता का पर्व
वैशाख पूर्णिमा का दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म और निर्वाण प्राप्ति का उत्सव मनाया जाता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और श्री विष्णुसहस्रनाम व श्री सूक्त का पाठ करते हैं। पूर्णिमा की रात चंद्रमा और गुरु के बीज मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। गौशाला में गाय को गुड़, चारा और पालक खिलाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पक्षियों को दाना-पानी देना भी पुण्यकारी होता है। यह दिन दान, ध्यान और धर्म के लिए आदर्श है।
Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग: तिथि, नक्षत्र और योग
12 मई 2025 को विक्रम संवत 2082 के वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। यह सोमवार का दिन है, और पर्व के रूप में पूर्णिमा व्रत मनाया जाएगा। सूर्योदय सुबह 5:33 बजे और सूर्यास्त शाम 7:01 बजे होगा। नक्षत्र स्वाती सुबह 6:15 तक रहेगा, इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। चंद्र राशि तुला (स्वामी ग्रह शुक्र) और सूर्य राशि मेष रहेगी। करण में विष्टि सुबह 9:17 तक, फिर बव रहेगा। योग वरियान रहेगा। इन विवरणों को जानकर आप अपने दिन की योजना बना सकते हैं।
शुभ मुहूर्त: कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय
आज के शुभ मुहूर्त नए कार्य शुरू करने और पूजा-अनुष्ठान के लिए आदर्श हैं। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 से 12:44 तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:21 से 3:26 तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:23 से 7:22 तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:05 से 5:06 तक और अमृत काल सुबह 6:02 से 7:42 तक रहेगा। निशीथ काल रात 11:41 से 12:21 तक और संध्या पूजन का समय शाम 6:21 से 7:09 तक रहेगा। इन समयों में पूजा, मंत्र जप और महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ फलदायी होगा।
अशुभ समय और दिशा शूल: सावधानी बरतें
राहुकाल सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से बचें। दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से परहेज करें। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो एक दिन पहले प्रस्थान का समय निकालकर यात्रा करें। इन सावधानियों से आप अपने कार्यों में बाधाओं से बच सकते हैं।
पूजा और उपाय: पुण्य और शांति के लिए
बुद्ध पूर्णिमा पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जप करें। घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें। गौशाला में गाय को रोटी, गुड़ और पालक खिलाएं। रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। ये उपाय आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएंगे। यह दिन ध्यान, दान और धर्म के लिए विशेष है, इसलिए जरूरतमंदों की मदद करें।
क्यों खास है बुद्ध पूर्णिमा?
बुद्ध पूर्णिमा न केवल धार्मिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें भगवान बुद्ध के शांति और अहिंसा के संदेश को अपनाने की प्रेरणा देता है। सनातन धर्म में यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है। पंचांग के अनुसार कार्य करने से जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।













