भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग को अधिक पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल बनाने के लिए एक अहम बदलाव किया है। रेल मंत्रालय के नए फैसले के तहत अब आधार से प्रमाणित IRCTC यूजर्स एडवांस रिजर्वेशन पीरियड के पहले दिन रात बारह बजे तक आरक्षित टिकट बुक कर सकेंगे। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है।
पहले ही लाइन में जवाब
कौन: भारतीय रेलवे
क्या: आधार प्रमाणित यूजर्स के लिए टिकट बुकिंग समय बढ़ाया गया
कब: एडवांस रिजर्वेशन पीरियड के पहले दिन
कहां: केवल IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर
क्यों: फर्जी बुकिंग रोकने और असली यात्रियों को प्राथमिकता देने के लिए
कैसे: आधार ऑथेंटिकेशन की समय सीमा बढ़ाकर
अब तक क्या नियम लागू थे
अब तक रेलवे की नीति के अनुसार जब भी किसी ट्रेन की एडवांस बुकिंग शुरू होती थी तो शुरुआती समय में केवल आधार से जुड़े IRCTC खाते ही टिकट बुक कर सकते थे।
पहले यह सुविधा
• सिर्फ पहले पंद्रह मिनट तक सीमित थी
• बाद में इसे सुबह आठ बजे से दस बजे तक बढ़ाया गया
इसका उद्देश्य यह था कि बुकिंग के शुरुआती दबाव में एजेंट और बॉट्स की बजाय वास्तविक यात्रियों को टिकट मिल सके।
नए फैसले में क्या बदला
रेलवे बोर्ड ने अब इस समय सीमा को और आगे बढ़ा दिया है। नए निर्देशों के अनुसार
एडवांस रिजर्वेशन पीरियड के पहले दिन रात बारह बजे तक केवल आधार प्रमाणित IRCTC खाते ही सामान्य आरक्षित टिकट बुक कर सकेंगे।
रेलवे बोर्ड ने यह जानकारी अठारह दिसंबर दो हजार पच्चीस को सभी प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में दी।
रेलवे को यह बदलाव क्यों जरूरी लगा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन टिकट बुकिंग में हर साल करोड़ों यात्री शामिल होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक IRCTC पर प्रतिदिन औसतन साठ लाख से अधिक टिकट बुक होते हैं। ऐसे में
• दलालों द्वारा फर्जी आईडी का इस्तेमाल
• बुकिंग के शुरुआती मिनटों में सीट ब्लॉक करना
• वास्तविक यात्रियों को नुकसान
जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही थीं।
एक वरिष्ठ रेलवे आईटी अधिकारी के अनुसार आधार ऑथेंटिकेशन से यूजर की पहचान पुख्ता होती है और सिस्टम का दुरुपयोग कम होता है। इससे सर्वर पर लोड भी नियंत्रित रहता है।
यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ेगा
इस फैसले से आम यात्रियों को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।
• लंबी दूरी की ट्रेनों में सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी
• एजेंट आधारित बुकिंग पर नियंत्रण होगा
• पारदर्शिता और भरोसा मजबूत होगा
• एक व्यक्ति कई फर्जी अकाउंट से टिकट नहीं ले पाएगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में रेलवे का मजबूत संकेत है।
PRS काउंटर पर क्या नियम बदले
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि
कंप्यूटरीकृत PRS काउंटरों से टिकट बुकिंग की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह नया नियम केवल IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए की जाने वाली ऑनलाइन बुकिंग पर ही लागू होगा।
आगे क्या हो सकता है
रेलवे आने वाले समय में
• आधार आधारित वेटिंग लिस्ट प्राथमिकता
• संदिग्ध अकाउंट की ऑटो पहचान
• टिकट कैंसलेशन पर बेहतर ट्रैकिंग
जैसे सुधारों पर भी काम कर सकता है। इससे डिजिटल टिकटिंग सिस्टम और अधिक सुरक्षित और यात्रियों के हित में बनने की उम्मीद है।












