Smartphone Privacy Settings : स्मार्टफोन अब केवल बातचीत करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह हमारी बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, सोशल मीडिया और निजी यादों का सबसे बड़ा लॉकर बन चुका है। आज के दौर में सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हर छोटे-बड़े काम के लिए मोबाइल का इस्तेमाल होता है। इस व्यस्त दिनचर्या के बीच स्मार्टफोन यूजर्स अनजाने में कुछ ऐसी सेटिंग्स को चालू छोड़ देते हैं, जो उनकी प्राइवेसी के लिए सीधे तौर पर बड़ा खतरा बन जाती हैं। समय-समय पर मोबाइल की प्राइवेसी सेटिंग्स की जांच न करना निजी डेटा लीक होने का सबसे मुख्य कारण बनता जा रहा है।
देशभर के स्मार्टफोन यूजर्स सबसे बड़ी गलती नया ऐप इंस्टॉल करते वक्त करते हैं। लोग बिना नियम व शर्तों को पढ़े ही धड़ाधड़ ‘Permissions Allow’ करते चले जाते हैं। यदि किसी फर्जी या संदिग्ध ऐप को आपके फोन के कैमरे, माइक्रोफोन और लाइव लोकेशन का एक्सेस मिल जाता है, तो हैकर्स घर बैठे आपके डिवाइस पर पूरी तरह नियंत्रण बना सकते हैं। इससे आपकी बैंकिंग डिटेल्स, निजी तस्वीरें और संवेदनशील दस्तावेज सीधे तौर पर साइबर अपराधियों के हाथ लग सकते हैं।
एंड्रॉयड के ये दो फीचर्स बचाएंगे आपका डेटा
अगर आप एंड्रॉयड स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो गूगल आपको सुरक्षा के दो बेहद शानदार इन-बिल्ट टूल्स देता है। इनमें ‘प्राइवेसी डैशबोर्ड’ (Privacy Dashboard) और ‘परमिशन मैनेजर’ (Permission Manager) शामिल हैं। इन सेटिंग्स की मदद से कोई भी सामान्य यूजर आसानी से यह देख सकता है कि उसके फोन में मौजूद कौन सा ऐप किस समय उसके डेटा को एक्सेस कर रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अगर आपने किसी ऐप को कैमरे या माइक की परमिशन दे रखी है, तो वह आपकी जानकारी के बिना भी बैकग्राउंड में इन्हें ऑन कर सकता है। इससे बचने के लिए लेटेस्ट एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में स्क्रीन के कोने पर एक ‘ग्रीन इंडिकेटर’ (हरा बिंदु) दिखाई देता है। अगर आपके फोन की स्क्रीन पर यह हरा निशान दिखे, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं क्योंकि उस वक्त आपके फोन का कैमरा या माइक्रोफोन एक्टिव रहता है।
लोकेशन की ये सेटिंग है सबसे ज्यादा खतरनाक
अक्सर देखने में आता है कि कई ऐप्स यूजर्स की लोकेशन को लगातार 24 घंटे ट्रैक करते रहते हैं। इसके जरिए ये कंपनियां यूजर्स की डेली एक्टिविटी और लोकेशन हिस्ट्री का एक बड़ा डेटाबेस तैयार कर लेती हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि किसी भी ऐप को परमिशन देते समय कभी भी ‘Allow All The Time’ वाले विकल्प को न चुनें। सुरक्षा के लिहाज से हमेशा ‘Only while using the app’ का विकल्प ही चुनना चाहिए ताकि ऐप बंद होते ही ट्रैकिंग भी बंद हो जाए।
इसके साथ ही, फोन में मौजूद पुराने और बेकार ऐप्स भी प्राइवेसी के लिए एक बड़ा टाइम बम साबित होते हैं। लोग किसी काम से ऐप डाउनलोड तो कर लेते हैं, लेकिन काम खत्म होने के बाद उन्हें महीनों तक अपडेट नहीं करते या यूं ही छोड़ देते हैं। भले ही आप ऐप खोलें या न खोलें, लेकिन उसे दी गई परमिशन बैकग्राउंड में हमेशा चालू रहती है। साइबर क्रिमिनल्स इन पुराने और अन-अपडेटेड ऐप्स की सुरक्षा कमियों का फायदा उठाकर आपके फोन में सेंध लगा देते हैं। इस खतरे से निपटने के लिए फोन में ‘Auto Reset Permissions’ फीचर को ऑन रखें, जो लंबे समय से इस्तेमाल न हो रहे ऐप्स की परमिशन को खुद-ब-खुद हटा देता है।
इस आसान तरीके से तुरंत चेक करें अपनी प्राइवेसी
अपने स्मार्टफोन को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए आपको कुछ बेहद आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे। सबसे पहले अपने फोन की मुख्य ‘Settings’ को ओपन करें। इसके बाद नीचे स्क्रॉल करके ‘Privacy’ या फिर ‘Security & Privacy’ वाले सेक्शन पर क्लिक करें।
यहाँ आपको ‘Permission Manager’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर टैप करें। अब परमिशन मैनेजर के अंदर जाकर कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन परमिशन की सूची को ध्यान से देखें। यदि आपको लगता है कि किसी गेमिंग या फोटो एडिटिंग ऐप को माइक्रोफोन या कैमरे की जरूरत नहीं है, तो तुरंत वहां जाकर उनके एक्सेस को ‘Don’t Allow’ या पूरी तरह डिसेबल कर दें। #SmartphoneSecurity #PrivacyAlert #AndroidTips #CyberSafety
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