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Ganga Chalisa Lyrics in Hindi: गंगा सप्तमी 2025 पर इस चालीसा के पाठ से मां गंगा करेंगी हर कष्ट दूर

On: मई 2, 2025 3:27 अपराह्न
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Ganga Chalisa Lyrics in Hindi: गंगा सप्तमी 2025 पर इस चालीसा के पाठ से मां गंगा करेंगी हर कष्ट दूर
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Ganga Saptami 2025 Ganga Chalisa Lyrics in Hindi: गंगा सप्तमी हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। इस दिन गंगा नदी में स्नान और पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि गंगा सप्तमी पर मां गंगा की विधिवत पूजा और विशेष चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, और सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है। आइए, गंगा सप्तमी 2025 की तिथि, पूजा विधि और गंगा चालीसा के महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, गंगा सप्तमी 2025 में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 3 मई को सुबह 7:51 बजे शुरू होगी और 4 मई को सुबह 7:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर, गंगा सप्तमी का पर्व 3 मई को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान और पूजा की तैयारी करें। अगर गंगा नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

गंगा सप्तमी पूजा विधि

गंगा सप्तमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर गंगा घाट पर जाएं या घर में पूजा स्थल तैयार करें। गंगा माता की मूर्ति या चित्र के सामने दीप और धूप जलाएं। फूल, अक्षत, और प्रसाद अर्पित करें। गंगा चालीसा का पाठ श्रद्धा के साथ करें। पूजा के बाद गंगाजल का छिड़काव करें और गरीबों को दान दें। अगर संभव हो, तो गंगा आरती में शामिल हों। यह पूजा न केवल पापों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि मन को शांति भी प्रदान करती है।

Ganga Chalisa Lyrics in Hindi: गंगा चालीसा

गंगा चालीसा का पाठ गंगा सप्तमी पर विशेष फलदायी माना जाता है। यह चालीसा मां गंगा की महिमा का गुणगान करती है और भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति देती है। कुछ चुनिंदा पंक्तियां इस प्रकार हैं:

जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।

जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥

चौपाई

जय जय जननी हरण अघ खानी।

आनंद करनि गंग महारानी॥

जय भगीरथी सुरसरि माता।

कलिमल मूल दलनि विख्याता॥

जय जय जहानु सुता अघ हनानी।

भीष्म की माता जगा जननी॥

धवल कमल दल मम तनु साजे।

लखि शत शरद चंद्र छवि लाजे॥

वाहन मकर विमल शुचि सोहै।

अमिय कलश कर लखि मन मोहै॥

जड़ित रत्न कंचन आभूषण।

हिय मणि हर, हरणितम दूषण॥

जग पावनि त्रय ताप नसावनि।

तरल तरंग तंग मन भावनि॥

जो गणपति अति पूज्य प्रधाना।

तिहूं ते प्रथम गंगा स्नाना॥

ब्रह्म कमंडल वासिनी देवी।

श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥

साठि सहस्त्र सागर सुत तारयो।

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गंगा सागर तीरथ धरयो॥

अगम तरंग उठ्यो मन भावन।

लखि तीरथ हरिद्वार सुहावन॥

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवट।

धरयौ मातु पुनि काशी करवट॥

धनि धनि सुरसरि स्वर्ग की सीढी।

तारणि अमित पितु पद पिढी॥

भागीरथ तप कियो अपारा।

दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥

जब जग जननी चल्यो हहराई।

शम्भु जाटा महं रह्यो समाई॥

वर्ष पर्यंत गंग महारानी।

रहीं शम्भू के जटा भुलानी॥

पुनि भागीरथी शंभुहिं ध्यायो।

तब इक बूंद जटा से पायो॥

ताते मातु भइ त्रय धारा।

मृत्यु लोक, नाभ, अरु पातारा॥

गईं पाताल प्रभावति नामा।

मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनि।

कलिमल हरणि अगम जग पावनि॥

धनि मइया तब महिमा भारी।

धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥

मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।

धनि सुरसरित सकल भयनासिनी॥

पान करत निर्मल गंगा जल।

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पावत मन इच्छित अनंत फल॥

पूर्व जन्म पुण्य जब जागत।

तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥

जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।

तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥

महा पतित जिन काहू न तारे।

तिन तारे इक नाम तिहारे॥

शत योजनहू से जो ध्यावहिं।

निशचाई विष्णु लोक पद पावहिं॥

नाम भजत अगणित अघ नाशै।

विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशै॥

जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।

धर्मं मूल गंगाजल पाना॥

तब गुण गुणन करत दुख भाजत।

गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥

गंगाहि नेम सहित नित ध्यावत।

दुर्जनहुँ सज्जन पद पावत॥

बुद्दिहिन विद्या बल पावै।

रोगी रोग मुक्त ह्वै जावै॥

गंगा गंगा जो नर कहहीं।

भूखे नंगे कबहु न रहहि॥

निकसत ही मुख गंगा माई।

श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥

महाँ अधिन अधमन कहँ तारें।

भए नर्क के बंद किवारें॥

जो नर जपै गंग शत नामा।

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सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥

सब सुख भोग परम पद पावहिं।

आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥

धनि मइया सुरसरि सुख दैनी।

धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥

कंकरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।

सुन्दरदास गंगा कर दासा॥

जो यह पढ़े गंगा चालीसा।

मिली भक्ति अविरल वागीसा॥

॥ दोहा ॥

नित नव सुख सम्पति लहैं।

धरें गंगा का ध्यान।

अंत समय सुरपुर बसै।

सादर बैठी विमान॥

संवत भुज नभ दिशि ।

राम जन्म दिन चैत्र।

पूरण चालीसा कियो।

हरी भक्तन हित नैत्र॥

इस चालीसा का पाठ करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी आती है। इसे पूजा के दौरान या दिन में किसी शुभ मुहूर्त में पढ़ें। चालीसा का पूरा पाठ करने से मां गंगा की कृपा प्राप्त होती है, और सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

गंगा सप्तमी का महत्व

हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। गंगा नदी को पापमोचिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और पूजा करने से पिछले जन्मों के पाप धुल जाते हैं। गंगा चालीसा का पाठ करने से मानसिक तनाव, रोग, और कष्ट दूर होते हैं। यह पर्व भक्तों को पवित्रता, भक्ति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण सिखाता है। गंगा माता की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

गंगा सप्तमी का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और भक्ति का अवसर है। इस दिन मां गंगा की पूजा और चालीसा पाठ को पूरी श्रद्धा के साथ करें। अगर आप गंगा घाट नहीं जा सकते, तो घर पर ही गंगाजल के साथ पूजा करें। यह पर्व हमें प्रकृति और पवित्र नदियों के संरक्षण का संदेश भी देता है।

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। कृपया अपनी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार पूजा करें।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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