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Gangaur Puja 2025: कब है गणगौर पूजा, जानें तारीख और इस त्योहार के खास गीत

On: April 8, 2025 12:04 PM
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Gangaur Puja 2025: कब है गणगौर पूजा, जानें तारीख और इस त्योहार के खास गीत

Gangaur Puja 2025: कब है गणगौर पूजा, जानें तारीख और इस त्योहार के खास गीत

Gangaur 2025 Puja songs lyrics: गणगौर 2025 में 15 से 31 मार्च तक मनाया जाएगा, जिसमें 31 मार्च मुख्य दिन होगा। गणगौर पूजा में महिलाएं शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजती हैं। गणगौर के गीत जैसे “गौर गौर गोमती” इस त्योहार को खास बनाते हैं। जानें गणगौर पूजा कब है और इसकी परंपराएं।

Gangaur Puja Geet lyrics in Hindi Gangaur 2025 Puja songs: गणगौर का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व खास तौर पर महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो इस दिन मिट्टी से शिव-पार्वती की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाती हैं। इन मूर्तियों को दूर्वा, फूल और पारंपरिक विधियों से सजाकर पूजा की जाती है। यह उत्सव कुल 17 दिनों तक चलता है, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को इसका सबसे खास दिन माना जाता है। एक रोचक बात यह है कि महिलाएं इस पूजा के बारे में अपने पति से कुछ नहीं कहतीं और न ही उन्हें पूजा का प्रसाद चखने को दिया जाता है। आइए जानते हैं कि 2025 में गणगौर पूजा कब होगी और इसके पारंपरिक गीत क्या हैं।

गणगौर पूजा 2025 की तारीख (Gangaur Puja Date 2025)

इस साल गणगौर का त्योहार 15 मार्च से शुरू होकर 31 मार्च तक चलेगा। लेकिन 31 मार्च का दिन सबसे खास होगा, क्योंकि इसी दिन इस पर्व का समापन होगा। इस दिन महिलाएं विशेष श्रद्धा के साथ पूजा करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

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गणगौर के पारंपरिक गीत (Gangaur Ke Geet)

गणगौर के दौरान गाए जाने वाले गीत इस त्योहार की शान हैं। ये गीत लोक परंपराओं और भावनाओं को बयां करते हैं। एक लोकप्रिय गीत है:

“गौर-गौर गणपति, ईसर पूजे पार्वती, पार्वती का आला गीला, गौर का सोना का टिका। टिका दे, टमका दे, राजा-रानी बरत करे। करता-करता आस आयो, वास आयो, खेरो-खांडो लाडू लायो। लाडू ले बीरा न दियो, बीरो म्हाने चुनड दी, चुनड को मैं बरत करयो। सन मन सोला, ईसर-गोरजा, दोनु जोड़ा, जोर ज्वार।”

इस गीत में सुहाग और समृद्धि की भावना झलकती है।

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खोल किवाड़ी: प्रार्थना गीत (Gangaur Ka Prasiddh Geet)

एक और मशहूर गीत है:

“गौरि ए गणगौरी माता! खोल किवाड़ी, बाहर उबी थारी पुजनवाली। पूजो ए पूजाओ बाई, काई-काई! मांगों? अन्न मांगों, धन मांगों, लाछ मांगों, लछमी। जलहर जामी बाबल माँगा, रातादेई माई।”

यह गीत पूजा के दौरान माता से आशीर्वाद मांगने की भावना को दर्शाता है।

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गौर गौर गोमती: लोकप्रिय गीत (Gaur Gaur Gomati Geet)

“गौर गौर गोमती, ईसर पूजे पार्वती, पार्वती का आला-गीला, गौर का सोना का टीका। टीका दे, टमका दे, बाला-रानी बरत करयो। करता-करता आस आयो, खेरे-खांडे लाडू आयो। लाडू ले बीरा ने दियो, बीरो ले मने पाल दी।”

इस गीत को गाते हुए महिलाएं सोलह बार दोहराती हैं और अंत में “एक-लो, दो-लो, तीन-लो… सोलह-लो” कहकर समाप्त करती हैं। ये गीत पीढ़ियों से चले आ रहे हैं और गणगौर की खुशी को दोगुना करते हैं।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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