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Hariyali Teej geet lyrics: हरियाली में गूंजे तीज के लोकगीत! यहां पढ़ें हरियाली तीज गीत लिरिक्स

On: July 26, 2025 11:53 AM
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Hariyali Teej geet lyrics: हरियाली में गूंजे तीज के लोकगीत! यहां पढ़ें हरियाली तीज गीत लिरिक्स
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Hariyali Teej geet lyrics in Hindi: हरियाली तीज गीत लिरिक्स हर उस महिला के दिल से जुड़ी होती हैं, जो तीज के त्यौहार को सिर्फ पूजा के रूप में नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में जीती है।

सावन की फुहारें, झूला झूलती सखियां, हरे रंग की साड़ियों में सजी महिलाएं और उनके बीच गूंजते मधुर लोकगीत – यही तो है हरियाली तीज का असली रंग!

साल 2025 में हरियाली तीज 27 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। पूजा के बाद शुरू होता है उत्सव का रंग, जहां लोकगीतों की मिठास सावन की ठंडी फिजाओं में घुल जाती है।

इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं कुछ बेहद खूबसूरत हरियाली तीज गीत लिरिक्स, जिन्हें आप अपने महिला कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम या सिर्फ घर की महफिल में गाकर इस पर्व को खास बना सकती हैं।

Hariyali Teej geet lyrics: “झुला झूल रही सब सखिया”

झुला झूल रही सब सखिया, आई हरियाली तीज आज,
राधा संग में झूले कान्हा, झूमे अब तो सारा भाग,
नैनं भर के रस का प्याला, देखे श्यामा को नंद लाला,
घन बरसे उमड़ उमड़ के, देखो नित करे ब्रिज बाला,
छमछम करती ये पायलियाँ, खोले मन के सारे राज,
झुला झूल रही सब सखिया, आई हरियाली तीज आज।
ये गीत सावन की रिमझिम और झूले के झूले को बखूबी बयां करता है। इसे तीज समारोह की शुरुआत में गाया जाता है।

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“नांनी नांनी बूंदियां”

नांनी नांनी बूंदियां, हे सावन का मेरा झूलणा,
एक झूला डाला मैंने बाबुल के राज में,
संग की सहेली, हे सावन का मेरा झूलणा,
ए झूला डाला मैंने भैया के राज में,
गोद भतीजा, हे सावन का मेरा झूलणा।

यह गीत उस भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है जो एक स्त्री को अपने मायके से होता है। गीत में झूले के बहाने भावनाएं झलकती हैं।

पिया की याद में भीगे बोल

अरी बहना! छाई घटा घनघोर, सावन दिन आ गए।
उमड़-घुमड़ घन गरजते, ठंडी-ठंडी पड़त फुहार,
बादल गरजे, बिजली चमकती, बरसत मूसलधार।
सखियां तो हिलमिल झूला झूलती, अरी बहना! हमारे पिया परदेस।
लिख-लिख पतियां मैं भेजती, अजी राजा सावन की आई बहार।

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इस गीत में एक स्त्री का विरह है जो सावन की सुंदरता में अपने पिया की कमी को महसूस कर रही है। यह गीत भावनात्मक रूप से हर महिला को जोड़ देता है।

राधे-कृष्ण प्रेम में डूबा गीत

सावन का महीना, झुलावे चित चोर,
धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,
मनवा घबराए मोरा, बहे पूरवैया,
झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां…
मेघवा तो गरजे, बोले कोयल कारी,
पाछवा में पायल बाजे, नाचे बृज की नारी…

यह गीत राधा-कृष्ण के प्रेम और सावन की रोमांटिकता को दर्शाता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसे बड़े चाव से गाया जाता है।

हरियाली तीज गीत लिरिक्स सावन की मस्ती और तीज के त्योहार को जीवंत कर देते हैं। महिलाएं झूला झूलते हुए, मेंहदी रचाते हुए इन लोकगीतों को गाकर अपने अनुभव को साझा करती हैं।

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‘झुला झूल रही सब सखिया’, ‘नांनी नांनी बूंदियां’, ‘सावन दिन आ गए’ और ‘सावन का महीना’ जैसे गीत हर तीज महफिल में रंग भर देते हैं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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