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Hindi Diwas Poem: हिंदी दिवस इन शानदार कविताओं से मचाएं धूम, स्कूल में बटोरें तालियां!

On: सितम्बर 13, 2025 6:29 पूर्वाह्न
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Hindi Diwas Poem: हिंदी दिवस इन शानदार कविताओं से मचाएं धूम, स्कूल में बटोरें तालियां!
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Hindi Diwas Poem: Make a splash on Hindi Diwas with these wonderful poems, get applause in school!: नई दिल्ली | हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यह वही दिन है जब 76 साल पहले, 14 सितंबर 1949 को, संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था।

यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व का पल है। 1953 से राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सुझाव पर पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है, जिसका मकसद हिंदी को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान देना है। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की हर जाति और समुदाय को जोड़ने वाली डोर है।

इस खास मौके पर स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में कविता, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। आइए, हम आपके लिए हिंदी दिवस पर कुछ शानदार कविताएं लेकर आए हैं, जो आपके कार्यक्रम को और खास बनाएंगी।

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हिंदी दिवस पर कविता: अपनी भाषा का अभिनंदन Hindi Diwas Poem

अभिनंदन अपनी भाषा का
करते हैं तन-मन से वंदन, जन-गण-मन की अभिलाषा का
अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का।
यह अपनी शक्ति सर्जना के माथे की है चंदन रोली
माँ के आँचल की छाया में हमने जो सीखी है बोली
यह अपनी बँधी हुई अंजुरी ये अपने गंधित शब्द सुमन
यह पूजन अपनी संस्कृति का यह अर्चन अपनी भाषा का।
सोम ठाकुर

गूंजी हिंदी विश्व में
स्वप्न हुआ साकार
राष्ट्र संघ के मंच से
हिन्दी का जयकार
हिन्दी हिन्दी में बोला
देश स्वभाषा प्रेम
विश्व अजरज में डोला
कह कैदी कविराय
मेम की माया टूटी
भारत माता धन्य
स्नेह की सरिता फूटी!

अटल बिहारी वाजपेयी

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छोटी कविता: हिंदी है मेरी माता
मेरी भाषा में तोते भी राम-राम जब कहते हैं।
मेरे रोम-रोम से मानो सुधा स्रोत तब बहते हैं।
सब कुछ छूट जाय मैं अपनी भाषा कभी न छोडूँगा।
वह मेरी माता है उससे नाता कैसे तोडूंगा।
मैथिलीशरण गुप्त

हिंदी: एकता की डोर
एक डोर में सबको जो है बांधती
वह हिंदी है
हर भाषा को जो सगी बहन मानती
वह हिंदी है।
भरी-पूरी हों सभी बोलियां
यही कामना हिंदी है
गहरी हो पहचान आपसी
यही साधना हिंदी है
गिरिराज कुमार माथुर

कक्षा 4, 8, 10 के लिए कविता
माँ भारती के भाल की शृंगार है हिंदी
हिंदोस्ताँ के बाग़ की बहार है हिंदी
घुट्टी के साथ घोल के माँ ने पिलाई थी
स्वर फूट पड़ रहा, वही मल्हार है हिंदी
तुलसी, कबीर, सूर औ’ रसखान के लिए
ब्रह्मा के कमंडल से बही धार है हिंदी
डॉ. जगदीश व्योम

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कविता पाठ के लिए टिप्स

इन कविताओं को मंच पर पढ़ते समय आपके चेहरे पर जोश और आत्मविश्वास झलकना चाहिए। अपनी आवाज में उतार-चढ़ाव लाएं और हिंदी के प्रति गर्व का भाव दिखाएं। यकीन मानिए, सभागार में बैठे लोग तालियां बजाने को मजबूर हो जाएंगे। हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है, जब 76 साल पहले हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला था। यह दिन हमारी भाषा और संस्कृति का उत्सव है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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