Kurma Jayanti 2025 Puja Vidhi, Muhurat, Vrat Katha Kurma Bhagwan Ki Aarti: सनातन धर्म में कूर्म जयंती का विशेष स्थान है, जब भगवान विष्णु ने अपने द्वितीय अवतार, कूर्म (कच्छप) के रूप में अवतरण किया था। यह पर्व समृद्धि, दीर्घायु और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है। हर साल वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह उत्सव भक्तों के लिए तीर्थ स्नान, दान और पूजा-अर्चना का अवसर लाता है। इस साल कूर्म जयंती 12 मई 2025 को मनाई जाएगी। आइए, इस पावन पर्व की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पौराणिक कथा को विस्तार से जानें।
कूर्म जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त: Kurma Jayanti 2025 Date And Time
कूर्म जयंती का यह पर्व 12 मई 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 4:21 बजे से 7:03 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 2 घंटे 42 मिनट होगी। वैशाख पूर्णिमा तिथि 11 मई 2025 को रात 8:01 बजे शुरू होगी और 12 मई 2025 को रात 10:25 बजे समाप्त होगी। इस समय भक्त भगवान कूर्म की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
कूर्म जयंती की पूजा विधि: Kurma Jayanti 2025 Puja Vidhi
कूर्म जयंती के दिन भक्त भगवान विष्णु और उनके कूर्म अवतार की विशेष पूजा करते हैं। पूजा की शुरुआत सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान से होती है। यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में गंगाजल मिले जल से स्नान करें। पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल या गौमूत्र छिड़ककर उसे पवित्र करें।
Kurma Jayanti Mantra
इसके बाद, पूजा स्थल पर लकड़ी का पटरा बिछाएं और उस पर तांबे के कलश में जल, फूल, दूध, तिल, गुड़ और चावल डालकर स्थापित करें। भगवान कूर्म या विष्णु की मूर्ति को स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान को तिलक लगाएं, दीप प्रज्वलित करें और अबीर, गुलाल, फूल, चावल आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:” मंत्र का जाप करें। अंत में भगवान कूर्म या श्री हरि विष्णु की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। कई भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं।
कूर्म जयंती का महत्व
सनातन धर्म में कूर्म जयंती को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कूर्म की पूजा से भक्तों को समृद्धि, स्वास्थ्य और लंबी आयु प्राप्त होती है। यह पर्व भक्तों को आध्यात्मिक शांति और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है। इस दिन तीर्थ स्नान और दान का विशेष महत्व है, जो पुण्य की प्राप्ति कराता है। कूर्म अवतार भगवान विष्णु की शक्ति और विश्व की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पौराणिक कथा: Kurma Jayanti Vrat Katha
पद्मपुराण के अनुसार, जब देवता और असुर मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तब मंदराचल पर्वत को मंथन दंड के रूप में इस्तेमाल किया गया। लेकिन आधार के अभाव में पर्वत समुद्र में डूबने लगा, जिससे मंथन असंभव हो गया। इस संकट को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया और अपनी पीठ पर मंदराचल पर्वत को संभाला। इस प्रकार, समुद्र मंथन सफल हुआ और अमृत सहित कई रत्न प्राप्त हुए। जिस दिन भगवान विष्णु ने यह अवतार धारण किया, वह कूर्म जयंती के रूप में मनाया जाता है।
कूर्म भगवान की आरती: Kurma Bhagwan Ki Aarti
कूर्म जयंती पर भक्त भगवान कूर्म की आरती गाकर उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। आरती में भगवान के कच्छप रूप, उनकी विश्व रक्षा की शक्ति और समुद्र मंथन में उनकी भूमिका का वर्णन होता है। यह आरती भक्तों में भक्ति और श्रद्धा का संचार करती है। कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
कूर्म भगवान की आरती
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
जग में नाम तुम्हारा है,
जग में नाम तुम्हारा है,
विश्व का भार तुम्हारा है,
विश्व का भार तुम्हारा है,
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
तुम हो विष्णु के अवतार,
तुम हो विष्णु के अवतार,
सागर मंथन में थे,
सागर मंथन में थे,
मंदराचल को संभाला है,
मंदराचल को संभाला है,
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
कछुए रूप में तुमने,
कछुए रूप में तुमने,
पृथ्वी को स्थिर रखा है,
पृथ्वी को स्थिर रखा है,
जग की रक्षा तुम्हारी है,
जग की रक्षा तुम्हारी है,
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
तुम हो ज्ञान और शक्ति के,
तुम हो ज्ञान और शक्ति के,
स्रोत तुम हो जग में,
स्रोत तुम हो जग में,
भक्ति और प्रेम तुम्हारा है,
भक्ति और प्रेम तुम्हारा है,
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
हे कूर्मदेव, कृपा करना,
हे कूर्मदेव, कृपा करना,
हम पर अपनी दृष्टि रखना,
हम पर अपनी दृष्टि रखना,
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
ऊं जय कूर्मदेव, कूर्मदेव
कूर्म जयंती न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह हमें प्रकृति और विश्व के संतुलन के महत्व को भी सिखाता है। भगवान कूर्म का अवतार हमें धैर्य, शक्ति और दृढ़ता का संदेश देता है। इस दिन भक्त अपने जीवन में स्थिरता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। चाहे आप मंदिर में पूजा करें या घर पर, यह पर्व आपके मन को शांति और आत्मा को पवित्रता प्रदान करेगा।
कूर्म जयंती 2025 के इस अवसर पर, आइए हम सब मिलकर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की आराधना करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को समृद्ध बनाएं। यह पर्व हमें एकजुटता और आध्यात्मिकता की राह पर ले जाता है।













