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Masik Shivratri 2025: भगवान शिव की इस खास आरती से पूरी होंगी हर मनोकामना!

On: April 25, 2025 9:03 PM
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Masik Shivratri 2025: भगवान शिव की इस खास आरती से पूरी होंगी हर मनोकामना!
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Masik Shivratri 2025 Om jai shiv omkara shiv ji ki aarti in Hindi: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति में डूबने का अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और आरती करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मनचाही मुरादें पूरी होती हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, शिव जी की पूजा बिना आरती के अधूरी मानी जाती है। आइए, जानते हैं मासिक शिवरात्रि 2025 की पूजा में पढ़ी जाने वाली खास आरती और इसके महत्व के बारे में।

Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि का महत्व

हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भोलेनाथ के भक्तों के लिए विशेष होता है, क्योंकि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर पूजा और आरती करने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन की बाधाएं भी दूर होती हैं। यह दिन भक्तों को अपने मन की कामनाएं भगवान शिव के चरणों में अर्पित करने का सुनहरा अवसर देता है।

भगवान शिव की आरती: Shiv ji ki aarti

पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करना अनिवार्य माना जाता है। यह आरती भोलेनाथ की महिमा का गुणगान करती है और भक्तों के मन को शांति प्रदान करती है। नीचे दी गई आरती को मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा के बाद गाएं और भगवान Ascertain से संपर्क करें।

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Om jai shiv omkara swami jai shiv omkara

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा।
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसानन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे।
दो भुज, चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे।
अक्षमाला, वनमाला, मुंडमाला धारी।
त्रिपुरारी, कंसारी, कर माला धारी।
श्वेतांबर, पीतांबर, बाघांबर अंगे।
सनकादिक, गरुड़ादिक, भूतादिक संगे।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे।
लक्ष्मी, सावित्री, पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।
पर्वत सोहें पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।
जटा में गंग बहत है, गल मुंड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।
त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

इस आरती को गाने से भक्तों का मन पवित्र होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह आरती भोलेनाथ के विभिन्न रूपों और उनकी महिमा का वर्णन करती है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

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कैसे करें मासिक शिवरात्रि की पूजा?

मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिव मंदिर में जाकर या घर पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में उपरोक्त आरती गाएं। पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान करें, इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्यों जरूरी है शिव जी की आरती?

स्कंद पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव की पूजा बिना आरती के अधूरी रहती है। आरती भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यह न केवल पूजा को पूर्णता देती है, बल्कि भक्तों के मन को शांति और सकारात्मकता से भर देती है। मासिक शिवरात्रि पर आरती गाने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

भक्ति से मिलेगी हर मनोकामना

मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन है। इस दिन सच्चे मन से पूजा और आरती करने से भोलेनाथ भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। चाहे वह आर्थिक समृद्धि हो, स्वास्थ्य हो या पारिवारिक सुख, शिव जी की भक्ति से सब कुछ संभव है। यह दिन भक्तों को अपने जीवन को बेहतर बनाने और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देता है।

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Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना है।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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