नई दिल्ली. स्मार्टफोन को हल्का बनाने में मैग्नीशियम और एल्युमीनियम का हाथ है। सर्किट में जंग रोकने के लिए सोने और चांदी की परत चढ़ाई जाती है। स्पीकर में नियोडिमियम और बैटरी में लिथियम का इस्तेमाल होता है।
हम दिन भर जिस स्मार्टफोन को अपनी हथेलियों में रखते हैं वह केवल प्लास्टिक या कांच का टुकड़ा नहीं है बल्कि यह विज्ञान का एक बेहतरीन नमूना है। क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों फीचर्स होने के बाद भी आपका फोन इतना हल्का कैसे रहता है या सालों तक चलने के बाद भी उसके अंदरूनी हिस्सों में जंग क्यों नहीं लगती।
इसका जवाब उन खास धातुओं यानी मेटल्स में छिपा है जो आपके फोन को स्मार्ट और ड्यूरेबल बनाते हैं। आज हम आपको फोन के अंदर मौजूद उस पूरी केमिस्ट्री लैब की सैर कराएंगे जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
बॉडी को हल्का और मजबूत बनाने का राज
जब आप कोई प्रीमियम फोन हाथ में लेते हैं तो वह आपको काफी हल्का महसूस होता है। इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ मैग्नीशियम और एल्युमीनियम का होता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार फोन का बाहरी ढांचा यानी फ्रेम एल्युमीनियम से बनाया जाता है जो इसे गिरने पर टूटने से बचाता है।
वहीं मैग्नीशियम का काम फोन के वजन को कम रखना है ताकि आप इसे घंटों तक बिना हाथ दर्द हुए इस्तेमाल कर सकें। इसके अलावा फोन के अंदरूनी हिस्सों को कसने के लिए स्टेनलेस स्टील के पेंच और छोटे पार्ट्स का उपयोग होता है जो इसे मजबूती देते हैं।
सर्किट बोर्ड में होता है असली सोना और चांदी
यह बात आपको हैरान कर सकती है लेकिन आपके फोन के मदरबोर्ड और सर्किट में तांबे के अलावा सोने और चांदी का भी इस्तेमाल होता है। फोन के माइक्रोचिप्स और सर्किट को मुख्य रूप से तांबे से बनाया जाता है जो बिजली का अच्छा सुचालक है। लेकिन तांबे के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसमें समय के साथ जंग लग सकता है।
यही कारण है कि कंपनियां सर्किट के नाजुक कनेक्शन पर सोने और चांदी की बहुत पतली परत चढ़ाती हैं। सोना एक ऐसा मेटल है जिसमें कभी जंग नहीं लगता और यह लंबे समय तक डाटा ट्रांसमिशन को बिना रुकावट जारी रखता है। यही वजह है कि पुराने फोन्स को रिसाइकिल करके उनसे गोल्ड निकाला जाता है जिसे अर्बन माइनिंग कहा जाता है।
बैटरी में लिथियम का कमाल
आजकल हर फोन में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है। लिथियम एक बहुत ही हल्का और अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु है। इसकी खासियत यह है कि यह कम जगह में ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकता है।
अगर लिथियम की जगह लेड या एसिड वाली बैटरियां इस्तेमाल होतीं तो आपका फोन ईंट जैसा भारी हो जाता। बैटरी के कैथोड में कोबाल्ट और ग्रेफाइट का भी उपयोग किया जाता है जो बैटरी की लाइफ बढ़ाने में मदद करते हैं।
स्पीकर और वाइब्रेशन में किसका इस्तेमाल?
जब आपके फोन की घंटी बजती है या गेम खेलते वक्त वाइब्रेशन होता है तो इसके पीछे नियोडिमियम नाम के मेटल का कमाल होता है। यह एक दुर्लभ मृदा तत्व यानी रेयर अर्थ मेटल है। नियोडिमियम से बने चुंबक आकार में बहुत छोटे होते हैं लेकिन इनकी चुंबकीय शक्ति सामान्य चुंबक से कई गुना ज्यादा होती है।
इसी वजह से फोन के छोटे से स्पीकर से भी इतनी तेज और साफ आवाज आती है। इसके अलावा माइक्रोफोन और वाइब्रेशन मोटर में भी इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है।
स्क्रीन में भी है धातुओं की परत
फोन की स्क्रीन केवल कांच नहीं है। इसे टच सेंसेटिव बनाने के लिए इंडियम टिन ऑक्साइड की एक पारदर्शी परत चढ़ाई जाती है। यह परत ही आपकी उंगली के स्पर्श को पहचानती है और प्रोसेसर तक सिग्नल पहुंचाती है।













